Insider Live: राजधानी पटना में पूर्व मुख्यमंत्री हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी के सरकारी आवास पर ब्राह्मण दलित एकता महाभोज की तैयारी जोरों-शोरों से की जा रही है। इस महाभोज के लिए ब्राह्मणों और दलितों को पहले ही आमंत्रण दिया जा चूका है। लेकिन जीतन राम मांझी के विवादित बयान के बाद से ब्राह्मण समाज उनसे नाराज है, कई जगह धरना प्रदर्शन किये गए तो कई जगह मांझी के पुतले फुके गए। ऐसे में ब्राह्मण समाज के लोगों का इस महाभोज का हिस्सा बनना मुश्किल है।
बता दें की इतना सब कुछ होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने आवास पर महाभोज करने के निर्णय पर अटल है, और महाभोज की जबरदस्त तैयारियां भी कर रहे है। आयोजित भोज में बिना लहसुन प्याज वाली सब्जी बनवाई जा रही हैं और तरह-तरह की पकवानों का भी प्रबंध किया गया है ।
मिली खबरों के हिसाब से मांझी के निमंत्रण पर बड़ी संख्या में ब्राहमण समाज के लोग उनके आवास पर भोज करने पहुंचे हैं। मांझी ने खुद अपने हाथों से ब्राह्मणों को दही चूड़ा परोसा। लेकिन वहां ब्राह्मणों के साथ धक्का मुक्की हो गई और ब्राह्मण नाराज होकर बिना खाए ही बाहर निकल गये। मांझी ने अपने भोज में आमंत्रित ब्राह्मणों के लिए शर्त रखी थी कि उनके वहां ऐसे ब्राहमण आये जो मांस-मदिरा और मछली का सेवन नहीं करते हो। इसी बात को लेकर वहां विवाद हो गया। ब्राहमणों को इसी बात की आपत्ति थी। ब्राहमण ने कहा कि बिहार में शराबबंदी है फिर मांझी यहां मदिरा पीने की बात कैसे कर रहे। हम लोग बस मांझी जी से यही पूछने आये हैं।
हालांकि पहले वहां पहुंचे ब्राह्मणों ने कहा कि उन्होंने मांझी को माफ़ कर दिया है। कई जिलों के ब्राह्मण मांझी के आवास पहुंच कर शंख बजाकर यह संदेश दिया कि वह मांझी के साथ हैं। मांझी ने भी पहले ही माफ़ी मांग ली थी और कहा था कि वह ब्राह्मण नहीं ब्राह्मणवाद के खिलाफ हैं। दरअसल, ब्राह्मणों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की भारी फजीहत हो रही है। मांझी के विवादित बयान के बाद उनका हर तरफ विरोध हो रहा है। इतना ही नहीं खुद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मांझी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। नीतीश कुमार भी मांझी के इस बयान से नाराज बताए जा रहे हैं।