बुधवार, 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुआ विमान हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि इसने देश की राजनीति को गहरे शोक और असहज सवालों के बीच ला खड़ा किया। लैंडिंग के दौरान हुए इस क्रैश में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आकस्मिक निधन हो गया। उनके साथ पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट शांभवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली और पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर विदीप जाधव की भी मौत हो गई।
सरकार ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने हादसे की तकनीकी जांच शुरू कर दी है, जबकि स्थानीय पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई। प्रशासन का कहना है कि ब्लैक बॉक्स, मौसम की स्थिति, लैंडिंग एप्रोच और मानव त्रुटि जैसे सभी पहलुओं की सूक्ष्मता से पड़ताल की जा रही है, ताकि दुर्घटना के कारणों पर किसी तरह का संदेह न रहे।
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बारामती, जो अजित पवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, उसी विद्या प्रतिष्ठान श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार, एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, राज्य मंत्री हसन मुश्रीफ सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। केंद्र और राज्य की शीर्ष नेतृत्व भी अंतिम विदाई में शामिल हुआ, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के दृश्य यह दर्शा रहे थे कि राजनीतिक मतभेदों से परे यह क्षण साझा शोक का था।
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हालांकि, शोक के बीच सियासत की तपिश भी तेज हो गई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हादसे की जांच को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक बहस को हवा दे दी। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हर विमानन दुर्घटना की नियमानुसार जांच होती है और किसी भी त्रासदी को साजिश से जोड़ना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, यह समय पवार परिवार के साथ खड़े होने का है, न कि आरोप-प्रत्यारोप का।
इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी बयान देते हुए कहा कि यह एक दुखद हादसा है और स्वयं शरद पवार ने राजनीति न करने की अपील की है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संवेदनशील समय में बयानबाजी पीड़ा को और बढ़ाती है। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि जांच की प्रक्रिया के समानांतर राजनीतिक बयान भी सुर्खियों में बने हुए हैं।





















