Ajit Pawar plane incident: महाराष्ट्र की राजनीति उस समय गहरे शोक और असमंजस में डूब गई जब सुबह-सुबह उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़ी विमान दुर्घटना की खबर सामने आई। यह घटना ऐसे समय पर हुई जब वे सार्वजनिक बैठकों में भाग लेने के लिए मुंबई से बारामती की ओर रवाना हुए थे। जैसे ही हादसे की सूचना फैली, राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और देशभर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान बारामती हवाई पट्टी के ऊपर कुछ देर तक अस्थिर स्थिति में चक्कर लगाता दिखाई दिया। लैंडिंग के प्रयास के दौरान संतुलन बिगड़ने से विमान जमीन से टकराया और तेज धमाके के साथ उसमें आग लग गई। आसपास के इलाकों में धुएं का गुबार फैल गया और विमान के टुकड़े उड़कर पास के घरों तक जा गिरे, जिससे स्थानीय लोगों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चश्मदीदों का कहना है कि दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए।
इस घटना ने केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति को भी झकझोर दिया। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र और प्रशासन के लिए गंभीर संकेत बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। लालू यादव ने लिखा कि ऐसी घटना कई सवाल खड़े करती है और सच्चाई सामने आना देशहित में जरूरी है।
तेजस्वी यादव ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताई। वहीं आरजेडी के अन्य नेताओं ने भी बयान जारी कर घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक उपमुख्यमंत्री से जुड़ा विमान हादसा केवल दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विमान ने सुबह लगभग 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी और 8:45 के आसपास रडार से उसका संपर्क टूट गया। कुछ ही मिनटों बाद बारामती के पास दुर्घटना की सूचना मिली। अधिकारियों का कहना है कि विमान में कुल पांच लोग सवार थे और सभी को तत्काल स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में खराब मौसम और तकनीकी कारणों की संभावना जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विपक्ष इसे सुरक्षा में चूक बता रहा है, जबकि सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने की बात कही है। जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक हादसे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन सकता है।


















