अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने 9 जनवरी, 2026 को एक बार फिर से भारत-पाकिस्तान विवाद को लेकर अपने विवादित बयान को दोहराते हुए दावा किया कि उनके हस्तक्षेप ने संभावित भारत-पाक युद्ध को टाल दिया और इसीलिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। ट्रंप के इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में फिर से चर्चा का दौर शुरू कर दिया है, जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे एक कूटनीतिक उपलब्धि मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे तनाव बढ़ाने वाला प्रचार भी कह रहे हैं।
ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में तेल-गैस अधिकारियों के साथ मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अमेरिका आए थे, उन्होंने सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया कि ट्रंप ने एक बड़े युद्ध और उससे जुड़ी मौतों से लाखों लोगों को बचाया। ट्रंप के अनुसार यह केवल भारत-पाक तनाव ही नहीं था, बल्कि वह विश्व में आठ अलग-अलग युद्धों को रोकने में भी सफल रहे हैं, इसलिए उन्हें शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
ट्रंप अपने बयान में यह भी दोहराते दिखे कि उन्होंने न केवल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम किया, बल्कि साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी संघर्ष टालने का काम किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी रहा होगा जिसने इतने बड़े संघर्षों को सुलझाया हो, इसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पुरस्कार के लिए शोबाज़ी करना नहीं है, बल्कि ज़िंदगियाँ बचाना है। हालांकि फिर भी उन्होंने कहा कि इनमें से कई संघर्षों को रोकने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
हालांकि इस पर भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति के दावों को खारिज किया है और कहा है कि भारत-पाक तनाव के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। दोनों देशों के सशस्त्र बलों के प्रमुखों के बीच प्रत्यक्ष समझौते और बातचीत के आधार पर ही संघर्ष विराम को स्वीकार किया गया था, इसका संकेत भारतीय अधिकारियों द्वारा दिया गया है।
















