बिहार की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। संसद में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) द्वारा दिए गए तीखे जवाब के बाद NDA नेताओं ने विपक्ष पर करारा पलटवार किया है। SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों को NDA नेताओं ने न केवल खारिज किया, बल्कि इसे विपक्ष की ‘हार के डर की रणनीति’ बताया है।
जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में पूरी मैराथॉन प्रक्रिया के बाद SIR तैयार हुआ, मतदाता सूची निर्धारित तारीख को प्रकाशित की गई और उसी आधार पर जनता ने NDA को स्पष्ट जनादेश दिया। उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जिस समय आपत्तियाँ दर्ज कराई जा सकती थीं, उस दौरान कांग्रेस नेता विदेश में थे, और अब चुनाव खत्म होने के बाद संदेह फैलाना केवल राजनीति का स्तर गिराता है। राजीव रंजन का दावा है कि आज तक किसी भी व्यक्ति या दल ने तथ्यों के साथ चुनाव प्रक्रिया पर कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई, इसलिए बिना आधार के सवाल उठाना विपक्ष के लिए ही ‘बैकफायर’ साबित होगा।
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RLM सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिहार की जनता पहले ही कांग्रेस और उसके सहयोगियों को जवाब दे चुकी है। उनका कहना है कि जिस SIR को मुद्दा बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसे बिहार की जनता ने चुनाव में नकार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानता है कि यह मुद्दा जनता में असर नहीं छोड़ता, फिर भी इसे उछालकर वह केवल राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है, जिसका परिणाम एक और हार के रूप में सामने आएगा।
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने संसद में अमित शाह के भाषण को विपक्ष के लिए ‘राजनीतिक झटका’ बताया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने तथ्यों के आधार पर राहुल गांधी और पूरी विपक्षी टीम को कड़ा जवाब दिया और संसद के भीतर उनकी दलीलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। शाहनवाज़ हुसैन के अनुसार, पहले संवैधानिक पदों पर पसंद-नापसंद के आधार पर नियुक्तियाँ होती थीं, लेकिन आज देश पूरी तरह नियमों के अनुसार चल रहा है। उन्होंने कहा कि अमित शाह के तर्कों के बाद कांग्रेस नेताओं का चेहरा उतर गया है और यह स्पष्ट है कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।






















