जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना अरशद मदनी (Arshad Madani Statement) के बयान पर बिहार की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। दिल्ली के एक प्रेस कांफ्रेंस में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में कोई भी मुसलमान किसी विश्वविद्यालय का कुलपति नहीं बन सकता है। उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि मौलाना अरशद मदनी साहब, ये हिंदुस्तान है, हिंदुस्तान की जम्हूरियत इतनी सुरक्षित और संरक्षित है।
जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि मौलाना मदनी साहब ये हिंदुस्तान है। हिंदुस्तान की जम्हूरियत इतनी सुरक्षित और संरक्षित है और आप ‘न्यूयॉर्क’ जा रहे हैं? नीतीश कुमार की तरफ नजरें तो इनायत कर लीजिए। फैजान मुस्तफा चाणक्य नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट के वाइस चांसलर हैं जो देश में एक मानक माना जा रहा है। मजहरुल हक अरबी-फ़ारसी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ मोहम्मद आलमगीर हैं।
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वहीँ अरशद मदनी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मदनी साहब शुरू से ही विद्रोह के मूड में रहते हैं। वे हमेशा भड़काऊ बयान देते हैं। ऐसा लगता है कि ये लोग जिन्ना के समर्थक हैं। अब्दुल कलाम और जाकिर हुसैन जैसे लोग हमारे आदर्श हैं। ऐसी भाषा बोलना मदनी साहब को शोभा नहीं देता है। भड़काऊ भाषण देने वालों को यह देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।
बिहार सरकार में मंत्री मोहम्मद ज़मा खान ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के बयान पर कहा कि बिहार की बात करें तो हम जिस नेता के साथ काम करते हैं उन्होंने कभी किसी वर्ग के साथ भी सौतेला व्यवहार नहीं किया है। वे सभी को साथ लेकर चलने की बात करते हैं। निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में बिहार में हमें जो नेतृत्व मिला है उसके तहत भी हम सभी को साथ लेकर चलेंगे। मुस्लिम वर्ग को हर जगह मान-सम्मान मिलता है और निश्चित तौर पर उनके लिए विकास कार्य भी होते हैं।






















