बिहार की राजनीति में इन दिनों बाढ़ विधानसभा क्षेत्र सुर्खियों में है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और चार बार के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू (Baadh MLA Gyanendra Singh Gyanu) ने आगामी विधानसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा कर राजनीतिक हलचल मचा दी है। उनके इस फैसले से न सिर्फ एनडीए गठबंधन में खलबली मच गई है, बल्कि बाढ़ की राजनीति में नया समीकरण भी बनता दिख रहा है।
ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने कहा कि अब वे स्वयं नहीं बल्कि बाढ़ की जनता तय करेगी कि वे चुनाव लड़ें या नहीं। यह बयान उस समय आया है जब सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कुछ कथित एनडीए समर्थकों की ओर से गाली-गलौज और अपशब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे वे बेहद आहत हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर से ही कुछ लोग उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
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बाढ़ विधानसभा क्षेत्र, जो परंपरागत रूप से क्षत्रिय समाज की सुरक्षित सीट मानी जाती है, इस बार टिकट के लिए कई दावेदारों के बीच संघर्ष का केंद्र बन गई है। भाजपा के अंदरूनी खींचतान और टिकट वितरण की राजनीति ने इस सीट को चर्चा में ला दिया है। ज्ञानू का कहना है कि उन्हें पार्टी के भीतर से ही चुनौती मिल रही है और कुछ संभावित प्रत्याशियों के समर्थक ही उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी बीच उन्होंने अपने समर्थकों की बैठक डाकबंगला परिसर में बुलाई है, जिसमें वे आगे की रणनीति तय करेंगे। बाढ़ की जनता और उनके समर्थक लगातार उनसे चुनाव मैदान में उतरने की अपील कर रहे हैं। कई स्थानीय संगठनों ने ज्ञानू के समर्थन में सोशल मीडिया अभियान भी शुरू कर दिया है।
दूसरी ओर, भाजपा के संभावित प्रत्याशी डॉ. प्रियरंजन ने कहा कि ज्ञानू को पार्टी पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अब वक्त है कि वरिष्ठ नेताओं को युवाओं को मौका देना चाहिए। उम्र और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने पर विचार करना चाहिए। डॉ. प्रियरंजन ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी पर दबाव बनाकर टिकट हासिल नहीं किया जा सकता।






















