Tarique Rahman India policy: बांग्लादेश के आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद बीएनपी प्रमुख और संभावित प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पहली बार भारत-बांग्लादेश संबंधों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति किसी देश विशेष के दबाव से नहीं, बल्कि बांग्लादेश और उसके नागरिकों के हितों के आधार पर तय होगी। इस बयान को नई सरकार के कूटनीतिक रुख का शुरुआती संकेत माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी देखी गई है।
चुनावी जीत के बाद तारिक रहमान की यह पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस थी और इसमें सबसे बड़ा सवाल यही था कि भारत के साथ संबंधों को लेकर उनकी सरकार किस दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने किसी टकराव या कठोर रुख का संकेत देने के बजाय व्यावहारिक नीति की बात की। उनका कहना था कि बांग्लादेश की प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता, आंतरिक सुरक्षा और आम जनता का कल्याण होगी, और विदेश नीति भी इन्हीं जरूरतों के अनुरूप तय की जाएगी।
पिछले करीब 18 महीनों में बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से जूझता रहा है। अंतरिम सरकार के दौर में भारत के साथ संबंधों में खटास आई थी और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया भी दी थी। ऐसे माहौल में तारिक रहमान का यह बयान संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वह न तो भारत-विरोधी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और न ही बिना शर्त नजदीकी का वादा कर रहे हैं।
बीएनपी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, नई सरकार की प्राथमिकता घरेलू संकटों से निपटना होगी, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्रीय कूटनीति को भी सक्रिय किया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि भारत के साथ “जन से जन संबंध” मजबूत करने की नीति अपनाई जाएगी ताकि व्यापार, आवागमन और सांस्कृतिक संपर्क को नई गति मिल सके। इसका मतलब यह भी है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय दौरों की संभावना बन सकती है।
हालांकि भारत-बांग्लादेश रिश्तों में एक बड़ा संवेदनशील मुद्दा शेख हसीना का भारत में निर्वासन बना हुआ है। बीएनपी पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह हसीना के प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध कर सकती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हसीना को बांग्लादेश लौटकर अपने खिलाफ दर्ज मामलों का सामना करना चाहिए। यह मुद्दा नई सरकार और भारत के बीच कूटनीतिक तनाव का कारण बन सकता है, क्योंकि भारत अब तक इस पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक रुख नहीं दिखा चुका है।




















