पश्चिम बंगाल की सियासत में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (Bengal Election 2026) नज़दीक आ रहे हैं, कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति और प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। कांग्रेस के बंगाल चुनाव प्रभारी डॉ शकील अहमद खान ने कहा है कि राज्य में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में है और भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे नफरत के माहौल को रोकना पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनके मुताबिक यह सिर्फ कांग्रेस की नहीं बल्कि उन सभी लोकतांत्रिक ताकतों की साझा जिम्मेदारी है, जो धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सौहार्द में विश्वास रखती हैं।
डॉ शकील अहमद खान का कहना है कि बंगाल की जनता ने हमेशा भाईचारे और विविधता की राजनीति को प्राथमिकता दी है। ऐसे में बीजेपी की वैचारिक राजनीति, जो समाज को बांटने का काम करती है, उसे यहां जड़ जमाने से रोकना बेहद जरूरी है। कांग्रेस इसी सोच के साथ हर स्तर पर संघर्ष कर रही है और जनता के मुद्दों को सड़कों से लेकर राजनीतिक मंच तक मजबूती से उठा रही है।
राहुल गांधी की सीट पर उठा सियासी तूफान.. राजेश राम ने कहा- भाजपा की लोकतंत्र-विरोधी मानसिकता
उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी रोजाना आंदोलन, जुलूस और जनसंपर्क अभियानों के जरिए लोगों की आवाज़ बुलंद कर रही है। चाहे वह SIR से जुड़ा मामला हो, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध हो या फिर मनरेगा योजना से जुड़े सवाल, कांग्रेस हर मोर्चे पर सक्रिय है। डॉ खान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ा है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के सामने बड़े पैमाने पर रोजगार संकट खड़ा हो गया है। इसका सीधा असर गरीब और वंचित तबके पर पड़ रहा है, जिसे कांग्रेस लगातार उजागर कर रही है।
टीएमसी के साथ चुनावी तालमेल को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ शकील अहमद खान ने साफ किया कि कांग्रेस की रणनीति पूरी तरह स्पष्ट है। पार्टी की पहली प्राथमिकता बीजेपी को वैचारिक और राजनीतिक रूप से पराजित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सीटों पर कांग्रेस की मजबूत पकड़ है, वहां पार्टी पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और बीजेपी को हराने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।






















