Bettiah Raj Land: पश्चिम चंपारण जिले में बेतिया राज की जमीन पर बसे सैकड़ों परिवारों की नींद अचानक उड़ गई है। भितहा प्रखंड में रहने वाले 355 परिवारों को जैसे ही अंचल प्रशासन की ओर से जमीन खाली करने का नोटिस मिला, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जिन घरों में पीढ़ियां पली-बढ़ीं, जिन दीवारों में जीवन भर की कमाई लगी, अब उन्हीं घरों पर बुलडोजर का साया मंडराने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई हाल की बसावट नहीं है। उनके पूर्वजों को बेतिया राज की ओर से जमीन दी गई थी और वे लोग 100 से 125 वर्षों से अधिक समय से यहां रह रहे हैं। समय बदला, सरकारें बदलीं, लेकिन इन परिवारों का रिश्ता इस जमीन से नहीं टूटा। अब अचानक आए नोटिस ने उन्हें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।
अंचल प्रशासन ने बेतिया राज प्रबंधक के निर्देश पर इन परिवारों को आवासीय भूमि खाली करने का आदेश दिया है। नोटिस में जमीन पर अवैध कब्जे की बात कही गई है और कागजात प्रस्तुत करने को कहा गया है। यहीं से विवाद की असली जड़ सामने आती है। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पहले जब जमीन मिली थी, तब के कागजात आज उनके पास नहीं हैं। बार-बार आई बाढ़, आगलगी और प्राकृतिक आपदाओं में पुराने दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं। ऐसे में अब उनसे कागज मांगना उनके साथ अन्याय है।
भितहा के कई ग्रामीणों का दर्द एक जैसा है। उनका कहना है कि अगर जमीन खाली कराई गई, तो उनका जीवन पूरी तरह बिखर जाएगा। घर टूटने का मतलब सिर्फ छत छिनना नहीं, बल्कि रोज़गार, सामाजिक पहचान और भविष्य की सारी उम्मीदें खत्म हो जाना है। कई परिवार मजदूरी करके किसी तरह जीवन यापन करते हैं। उन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर घर बनाया है। अब अगर वह भी चला गया, तो उनके पास दोबारा घर बसाने का कोई साधन नहीं बचेगा।
ग्रामीण यह भी बता रहे हैं कि उन्होंने कभी खुद को अवैध नहीं माना। वे सरकारी योजनाओं के लाभार्थी रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं भी इन्हीं घरों से जुड़ी हैं। ऐसे में अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी कहकर हटाने की तैयारी ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
इस पूरे मामले में ग्रामीण सरकार और बेतिया राज प्रबंधन से सहानुभूति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि अगर जमीन खाली करानी ही है, तो उन्हें लीज पर या नई नीलामी के माध्यम से वही जमीन दी जाए, ताकि वे बेघर न हों। उनका साफ कहना है कि वे गरीब हैं, मजदूर हैं और उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। भितहा के अंचलाधिकारी मनोरंजन शुक्ला का कहना है कि अंचल कार्यालय केवल बेतिया राज प्रबंधक के निर्देशों का पालन कर रहा है। जमीन से जुड़े फैसले और सहानुभूति बरतने या कार्रवाई करने का अधिकार बेतिया राज प्रबंधन के पास है। अंचल की भूमिका सिर्फ नोटिस जारी करने और प्रक्रिया का पालन करने तक सीमित है।






















