बिहार के भागलपुर में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम (Bhagalpur Jan Samvad) उस वक्त सिर्फ शिकायत सुनने का मंच नहीं रहा, बल्कि जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार पर सरकार के रुख का बड़ा संकेत बन गया। टाउन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में जैसे ही फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया, पूरा माहौल गर्मा गया। भूमि एवं राजस्व विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के सामने फरियादी का गुस्सा फूट पड़ा और आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
जन संवाद में शिकायत लेकर पहुंचे मंजर आलम ने दावा किया कि भागलपुर में जमीन माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास दलालों का खुला नेटवर्क काम कर रहा है। उनका कहना था कि मृत व्यक्तियों को पहचानकर्ता बनाकर जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराई जा रही है, जिससे असली जमीन मालिकों के अधिकार खतरे में पड़ रहे हैं। यह आरोप केवल किसी एक व्यक्ति की शिकायत नहीं लगे, बल्कि वर्षों से चले आ रहे कथित सिस्टम पर सीधा हमला थे।
मंजर आलम ने अपनी बात को और गंभीर बनाते हुए गौराडीह अंचल अधिकारी तानिया कुमारी और कर्मचारी साकेत कुमार पर भी आरोप लगाए। जैसे ही ये नाम सामने आए, कार्यक्रम स्थल पर हलचल मच गई और जन संवाद कुछ देर के लिए तीखी बहस का केंद्र बन गया। यह दृश्य दिखाता है कि जमीन से जुड़े विवाद केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विश्वास का भी सवाल बन चुके हैं।
शिकायत सुनते ही उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने मौके पर मौजूद जिलाधिकारी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जमीन माफियाओं की पहचान कर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि भूमि से जुड़े भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।






















