बिहार में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने एक सख्त और परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार की है। विभाग अब केवल दुर्घटनाओं के कारणों की रिपोर्ट तैयार करके मामला नहीं छोड़ेगा, बल्कि ठोस कदम उठाएगा ताकि राज्य में हादसों का ग्राफ तेजी से नीचे आए।
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परिवहन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक दुर्घटनाओं वाले स्थलों यानी ब्लैक स्पॉट की नए सिरे से पहचान की जाएगी। इन ब्लैक स्पॉट को अप्रैल 2026 तक पूरी तरह से ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग का कहना है कि राज्य की सभी सड़कों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप दुरुस्त किया जाएगा, ताकि बेगुनाह जानें बचाई जा सकें।परिवहन विभाग के अनुसार, किसी भी सड़क पर यदि दुर्घटना संभावित स्थल चिन्हित होता है तो वहां सुधार कार्य तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा. उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं न हों. इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा, जिनमें संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और उनकी स्पष्ट जवाबदेही तय की जाएगी.
दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नेक मददगारों यानी ‘गुड सेमेरिटन’ से पुलिस किसी तरह की पूछताछ नहीं करेगी. वहीं इलाज के दौरान पैसों की कमी के कारण किसी भी घायल का उपचार रोका नहीं जाएगा. एंबुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड में रखा जाएगा और देरी को गंभीरता से लिया जाएगा.






















