बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) के नतीजों के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। चुनाव परिणाम सामने आते ही तेजस्वी का बिहार से बाहर जाना और फिर उनकी विदेश यात्रा की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर वायरल होना राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। अब राष्ट्रीय जनता दल ने ऐलान किया है कि खरमास के बाद तेजस्वी यादव राज्य भर में एक व्यापक यात्रा पर निकलेंगे, जिसे पार्टी जन विश्वास, जन आकांक्षा और जन सरोकार यात्रा के रूप में पेश कर रही है।
चुनाव में राजद को सिर्फ 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि एनडीए ने 202 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की। नतीजों के बाद तेजस्वी यादव का लंबे समय तक बिहार से बाहर रहना विपक्ष की सक्रियता पर सवाल खड़े करने लगा। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनके विदेश दौरे के वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जिनमें वे कार ड्राइविंग और स्पीड बोट का आनंद लेते दिखे। इससे यह बहस और तेज हो गई कि क्या विपक्ष का नेता चुनावी हार के बाद जमीनी राजनीति से कट गया है।
इन सवालों के बीच राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव खरमास के बाद बिहार लौटकर जनता के बीच जाएंगे। उनका कहना है कि महागठबंधन को करीब एक करोड़ 90 लाख वोट मिले हैं और यह हार लोकतांत्रिक नहीं बल्कि “मशीन तंत्र” का नतीजा है। राजद की रणनीति साफ तौर पर चुनाव परिणामों पर सवाल उठाने और सरकार को जन समर्थन के आधार पर घेरने की दिखाई दे रही है।
दूसरी ओर भाजपा और एनडीए ने तेजस्वी की प्रस्तावित यात्रा को लेकर तीखा हमला बोला है। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने तंज कसते हुए कहा कि घूमने-फिरने से तेजस्वी फ्रेश हो जाएंगे, लेकिन जनता सब देख रही है। उनके मुताबिक इतनी बड़ी हार के बाद तेजस्वी मानसिक दबाव में हैं और कांग्रेस भी अब उनके साथ नहीं है। एनडीए का दावा है कि नीतीश कुमार के विकास कार्यों के नाम पर जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है।
तेजस्वी की यात्रा को लेकर कांग्रेस ने भी फिलहाल दूरी बना ली है। कांग्रेस विधान परिषद सदस्य समीर सिंह ने साफ किया कि पार्टी का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा और इस समय कांग्रेस और राजद एक साथ नहीं हैं। यह बयान महागठबंधन की भविष्य की राजनीति को लेकर नए सवाल खड़े करता है।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने भी तेजस्वी यादव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठने का अवसर दिया, लेकिन वे विधानसभा सत्र से गायब रहे। उनके अनुसार विपक्ष का असली काम सरकार की कमियों को सदन में उठाना होता है और सिर्फ यात्रा निकालने से राजनीतिक तस्वीर नहीं बदलने वाली।






















