पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 1962 कई ऐतिहासिक पहलुओं के कारण विशेष रूप से याद किया जाता है। इस चुनाव में महिलाओं ने शानदार प्रदर्शन किया और 46 महिला उम्मीदवारों में से 25 ने जीत दर्ज की। यह आजादी के बाद तीसरा विधानसभा चुनाव था, जिसमें पहली बार एकल सीट पर प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे पहले 1951 और 1956 के चुनावों में कई सीटों पर संयुक्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था थी।
महिलाओं ने रचा इतिहास
इस चुनाव में महिलाओं ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई और 25 सीटों पर जीत हासिल कर बिहार विधानसभा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करवाई। यह उस समय महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
कांग्रेस फिर बनी सबसे बड़ी पार्टी
कांग्रेस ने इस चुनाव में भी अपना वर्चस्व कायम रखा और कुल 318 सीटों में से 185 पर जीत दर्ज की। वहीं, स्वतंत्र पार्टी ने 50 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी। उस समय बिहार और झारखंड संयुक्त रूप से एक ही राज्य में शामिल थे, इसलिए पूरे क्षेत्र में चुनाव हुए थे।
बिहार विधानसभा चुनाव 1957: कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत, राष्ट्रीय दलों का दबदबा
भारतीय जनसंघ ने खोला खाता
पहली बार भारतीय जनसंघ (अब भाजपा) को बिहार विधानसभा में सफलता मिली। पार्टी ने इससे पहले के दो चुनावों (1951 और 1957) में कोई सीट नहीं जीती थी, लेकिन 1962 में तीन सीटों पर जीत हासिल की।
• हिलसा: जगदीश प्रसाद
• सीवान: जनार्दन तिवारी
• नवादा: गौरीशंकर केसरी
इन तीनों नेताओं ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को हराकर जनसंघ के लिए नई उम्मीदें जगाईं। इसके बाद पार्टी का ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ने लगा।
जनसंघ की पिछली विफलताएं और 1962 की सफलता
• 1951 का चुनाव: जनसंघ को मात्र 1.18% वोट मिले थे और कोई सीट नहीं मिली थी। कांग्रेस ने तब 239 सीटें जीती थीं।
• 1957 का चुनाव: जनसंघ ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सिर्फ 1.23% वोट ही मिले।
• 1962 का चुनाव: पहली बार तीन विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे, जिससे पार्टी को मजबूती मिली।
मतदान और मतदाताओं की संख्या
• कुल मतदाता: 2,21,15,041 (2.21 करोड़)
• मतदान करने वाले मतदाता: 98,33,810 (98.33 लाख)
• मतदान प्रतिशत: 44.47%
उस समय चुनाव प्रचार बेहद कठिन था। उम्मीदवारों को घर-घर जाकर प्रचार करना पड़ता था, क्योंकि परिवहन के साधन सीमित थे।
मतदान केंद्रों की स्थिति
• कुल मतदान केंद्र: 24,215
• प्रति मतदान केंद्र औसत मतदाता: 913
विधानसभा क्षेत्रों की श्रेणियां और उम्मीदवारों की संख्या
• सामान्य सीटें: 1218 उम्मीदवार
• अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 170 उम्मीदवार
• अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 141 उम्मीदवार
कुल मिलाकर, 1962 का बिहार विधानसभा चुनाव कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी बना। महिलाओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, कांग्रेस ने अपनी सत्ता बरकरार रखी, जनसंघ ने पहली बार जीत दर्ज की, और स्वतंत्र पार्टी ने कांग्रेस को चुनौती दी। यह चुनाव बिहार की राजनीति के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत था।






















