बिहार विधानसभा में आज (Bihar Assembly Today) सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के विधायकों ने वॉकआउट कर दिया, जिससे प्रश्नोत्तर काल में सत्ता पक्ष के सामने सवालों का माहौल लगभग खाली कुर्सियों के बीच रह गया। लेकिन इसी खालीपन के बीच एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब राजद की वारसलीगंज विधायक अनीता अचानक सदन में लौटीं और अपने प्रश्नों को उठाने लगीं। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति दी, जिसके बाद सदन में कुछ देर के लिए राजनीतिक हलचल लौट आई। यह दृश्य अपने आप में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जटिलताओं और विपक्ष की रणनीति पर नए सिरे से सोचने का संकेत बन गया।
कबड्डी वर्ल्ड कप पर क्यों लगा ब्रेक? खेल मंत्री श्रेयसी सिंह को भाजपा विधायक ने घेरा
इस पूरे घटनाक्रम पर संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी की प्रतिक्रिया ने बहस को और धार दी। उन्होंने इस स्थिति को सदन में वॉकआउट की ‘नई शैली’ बताते हुए तंज कसा। उनका कहना था कि विपक्ष के सदस्यों को वॉकआउट करने का अधिकार है और सरकार उस अधिकार को चुनौती नहीं देती, लेकिन सदन में आकर सवाल पूछना भी उतना ही संवैधानिक अधिकार है। सरकार चाहती है कि विपक्ष अपनी भूमिका निभाए, सवाल करे और जवाबदेही तय करे, ताकि लोकतांत्रिक संवाद जीवित रह सके। मंत्री के मुताबिक, सदन खाली होने से न तो सरकार की जवाबदेही खत्म होती है और न ही विपक्ष की जिम्मेदारी।
विधान परिषद में सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने.. सभापति ने कहा- ‘आप लोग बाहर जाइए’, बुला लिया मार्शल
विजय कुमार चौधरी ने पूर्व के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी ऐसा हुआ है जब कोई सदस्य अकेले सदन में मौजूद रहा, उसने अपना प्रश्न पूछा और सरकार ने जवाब दिया। बाद में वह संतुष्ट होकर बाहर चला गया। इसी परंपरा के तहत अनीता का वापस आकर सवाल पूछना असंवैधानिक नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकार का इस्तेमाल है। सरकार ने इसे स्वीकार किया और उनके प्रश्नों का उत्तर दिया। लेकिन मंत्री ने यह भी जोड़ा कि सदन से बाहर रहकर सवाल पूछने की मानसिकता लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं मानी जा सकती, क्योंकि संसद या विधानसभा में उपस्थिति ही संवाद और जवाबदेही की असली कसौटी है।






















