बिहार में विभागों के बंटवारे के बाद अब राजनीतिक हलचल पूरी तरह विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव पर आ गई है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगली बड़ी परीक्षा स्पीकर पद पर सहमति बनाने की है। जैसे ही विशेष सत्र की तैयारी तेज हुई है, वैसे ही NDA के भीतर इस अहम पद को लेकर मंथन गहरा हो गया है। सभी 243 नव-निर्वाचित विधायकों की शपथ से पहले राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और अंदरूनी बातचीत ने सियासी तापमान को नया मोड़ दे दिया है।
राज्यपाल जल्द ही प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करेंगे, जो विधायकों को शपथ दिलाएंगे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के लिए मतदान होगा। सत्ता समीकरणों के लिहाज से यह पद सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर शक्ति-संतुलन तय करने का अहम केंद्र माना जा रहा है। यही वजह है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों अपने दावेदारों को सामने लाने से पहले हर पहलू पर विचार कर रहे हैं।
बीजेपी की ओर से सबसे चर्चित नाम प्रेम कुमार का है, जो गया टाउन से नौवीं बार विधायक बने हैं और लंबे समय तक मंत्री भी रहे हैं। उन्हें वरिष्ठता और संगठन के भरोसेमंद चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ जेडीयू में झाझा के विधायक दामोदर रावत की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि विधानसभा में स्थिरता और अनुभव के लिहाज से रावत भी उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं।
दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है और पिछली विधानसभा का समीकरण भी इस निर्णय को प्रभावित कर सकता है। तब स्पीकर की कुर्सी बीजेपी के पास थी और उपाध्यक्ष पद जेडीयू के हिस्से में गया था। इस बार भी संतुलन साधने की कोशिश होगी, लेकिन एनडीए की ताजा राजनीति पहले जैसी सरल नहीं है। जेडीयू यह तर्क दे रही है कि विधान परिषद में सभापति का पद बीजेपी को मिल चुका है, ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष जेडीयू को मिलने पर विचार होना चाहिए। वहीं बीजेपी के भीतर यह राय मजबूत है कि वरिष्ठता के आधार पर प्रेम कुमार स्वाभाविक दावेदार हैं।
इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नीतीश कुमार के संकेत और NDA की औपचारिक बैठक में तय रणनीति पर निर्भर करेगा। विशेष सत्र की तारीख तय होने के साथ ही यह मामला और स्पष्ट होगा।






















