बिहार में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बैंकों की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (Bihar Bankers Committee) की 95वीं त्रैमासिक बैठक में राज्य सरकार ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जाहिर की। बैठक का उद्घाटन उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, वित्त मंत्री विजेंद्र यादव और मंत्री रामकृपाल यादव ने संयुक्त रूप से किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और बैंकों के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, लेकिन चर्चा के दौरान यह साफ हो गया कि बैंक राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं।
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार को विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब बैंक सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों और समीक्षा से यह उजागर हुआ है कि बैंक न तो योजनाओं के तहत लाभुकों को समय पर लाभ दे रहे हैं और न ही राज्य के लोगों को पर्याप्त ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। मंत्री ने इसे खतरनाक लापरवाही करार देते हुए कहा कि अगर यही रवैया जारी रहा तो विकास की रफ्तार प्रभावित होगी।
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वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एक निगरानी समिति का गठन कर दिया है। यह समिति बैंकों के कामकाज पर नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें। उन्होंने संकेत दिया कि अब बैंकों की जवाबदेही तय की जाएगी और लापरवाही पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में मंत्री रामकृपाल यादव ने भी बैंकों के रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने बैंकों को आईना दिखाया गया है। उनका आरोप था कि बैंक बिहार के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं, न तो पर्याप्त लोन दे रहे हैं और न ही आम लोगों की भलाई के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक बैंक अपने दृष्टिकोण में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक बिहार का समग्र विकास संभव नहीं है।
मंत्रियों ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ही बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन बैंकों का असहयोग इस लक्ष्य में बड़ी बाधा बन रहा है। बैठक के दौरान सरकार ने बैंकों को साफ संदेश दिया कि अब पुरानी कार्यशैली नहीं चलेगी और उन्हें अपने रवैये व सिस्टम में सुधार करना ही होगा। इस बैठक को सरकार और बैंकों के बीच एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में बिहार की विकास योजनाओं पर साफ नजर आ सकता है।






















