बिहार में किशोरों के नाम पर सिम कार्ड लेने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल लगभग 7 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं, जिनमें से करीब एक करोड़ सिम कार्ड 9 से 17 वर्ष की आयु के किशोरों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं।
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वर्ष 2021 में यह संख्या मात्र 20,466 थी, लेकिन अब यह आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है। यह वृद्धि मुख्य रूप से किशोरों की बढ़ती डिजिटल पहुंच, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी है, लेकिन इससे जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
किशोरों के नाम पर सिम का इस्तेमाल फ्रॉड, ठगी, साइबर बुलिंग या अन्य अवैध गतिविधियों में हो सकता है, क्योंकि बच्चे कानूनी जिम्मेदारी से कम समझते हैं।माता-पिता अक्सर बच्चों के लिए सिम लेते हैं, लेकिन बिना उचित निगरानी के यह समस्या बन जाता है।






















