Bihar Politics: बिहार में भू-माफिया और जमीन दलालों के खिलाफ चल रहा सख्त सरकारी अभियान अब प्रशासनिक कार्रवाई से निकलकर सीधे सियासी रणभूमि में पहुंच चुका है। राज्य में जैसे-जैसे चुनावी माहौल आकार ले रहा है, वैसे-वैसे जमीन से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच टकराव तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में जनता दल यूनाइटेड द्वारा आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमीन और संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है।
जेडीयू का तर्क है कि यदि सरकार भू-माफिया और जमीन दलालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, तो जांच का दायरा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कानून का राज तभी स्थापित होगा जब हर प्रभावशाली व्यक्ति और हर संदिग्ध संपत्ति की निष्पक्ष पड़ताल हो। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा से इस दिशा में सख्त और त्वरित कदम उठाने की अपील करते हुए संकेत दिया है कि मौजूदा अभियान को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पटना हाई कोर्ट के नए CJ जस्टिस संगम कुमार साहू, अधिसूचना जारी
इस मांग पर राष्ट्रीय जनता दल ने तीखा पलटवार किया है। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने जेडीयू और भाजपा पर “लालू-परिवार फोबिया” से ग्रसित होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। उनके मुताबिक महंगाई, रोजगार और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों पर जवाब देने के बजाय सत्तारूढ़ दल जांच की मांगों को उछालकर जनता का ध्यान भटकाना चाहता है। तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि जब पटना से दिल्ली तक एक ही गठबंधन की सरकार है, तो फिर जांच की मांग किससे की जा रही है।
आरजेडी का यह भी आरोप है कि जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों को राजनीतिक हथियार बनाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की जा रही है, जबकि आम जनता आज भी बढ़ती कीमतों और रोजगार संकट से जूझ रही है। पार्टी का दावा है कि सत्ताधारी दल इन वास्तविक मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए जांच जैसे विषयों को चुनावी एजेंडे में बदल रहा है।
दूसरी ओर जेडीयू और भाजपा का कहना है कि भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था को साफ करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका तर्क है कि अगर राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों की संपत्तियों पर सवाल उठते हैं, तो जांच से पीछे हटना कानून के राज के खिलाफ होगा।






















