Bihar BISF: बिहार इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां विकास की रफ्तार और कानून-व्यवस्था का तालमेल राज्य की नई पहचान गढ़ने की कोशिश कर रहा है। लंबे समय से उद्योगपतियों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा रही है, लेकिन अब सरकार ने इसकी जड़ पर प्रहार करने का दावा किया है। नए औद्योगिक सुरक्षा ढांचे बीआईएसएफ (Bihar Industrial Security Force) को इसी बदले हुए बिहार की तस्वीर का केंद्र माना जा रहा है। सरकार इस फोर्स को केवल उद्योगों की सुरक्षा तक सीमित नहीं देख रही, बल्कि इसे अपराध के स्थापित नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक हथियार की तरह पेश कर रही है, जो आने वाले दिनों में राज्य की पूरी कानून व्यवस्था का चेहरा बदल सकता है।
सीएम नीतीश कुमार ने बीआईएसएफ को आधुनिक और प्रोफेशनल सुरक्षा व्यवस्था की नई कड़ी बताते हुए कहा कि आने वाले पांच वर्षों में बिहार औद्योगिक निवेश का प्रमुख गंतव्य बनने जा रहा है और इस निवेश की सुरक्षा के लिए एक प्रशिक्षित, हाईटेक और निष्पक्ष फोर्स अनिवार्य थी। इसी सोच के तहत बीआईएसएफ की संरचना सीआईएसएफ जैसी बनाई जा रही है, जिसमें अनुभवी पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षित जवान और टेक-ड्रिवेन सिक्योरिटी सिस्टम शामिल होंगे।
इस फोर्स का सीधा उद्देश्य उद्योग क्षेत्रों को एक हाई सिक्योरिटी जोन में बदलना है, जहां हर गतिविधि पर 24×7 मॉनिटरिंग हो सके। इससे न केवल इंडस्ट्रियल एरिया सुरक्षित होंगे, बल्कि उस आपराधिक तंत्र पर भी कड़ी चोट लगेगी जो वर्षों से रंगदारी, धमकी और अवैध वसूली के सहारे खड़ा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ साफ बता रहे हैं कि बीआईएसएफ की तैनाती उद्योगपतियों के डर को खत्म करेगी और ये संकेत भी देगी कि बिहार अब अपराधियों का आसान इलाका नहीं रहा।
लंबे समय से उद्यमियों की सबसे बड़ी शिकायत यही थी कि स्थानीय गैंगस्टर निवेश और उद्योग के विस्तार में रुकावट डालते हैं। कई उद्योग प्रोजेक्ट शुरुआत से पहले ही अटक जाते थे क्योंकि असुरक्षा का माहौल निवेशकों का आत्मविश्वास तोड़ देता था। लेकिन बीआईएसएफ की मौजूदगी इन माफिया समूहों के पैठ को खत्म करने का काम करेगी, क्योंकि यह फोर्स स्थानीय दबावों, राजनीतिक प्रभाव और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होगी। ड्रोन निगरानी से लेकर आरएफआईडी आधारित एंट्री सिस्टम और रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट्स तक, पूरा नेटवर्क अपराधियों के लिए एक नए स्तर की चुनौती पैदा करेगा। जब हर क्षेत्र सख्त सुरक्षा दायरे में होगा तो अपराध का फैलाव भी स्वतः सिमट जाएगा।
राजनीतिक संकेत भी साफ हैं। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी लगातार ‘गुंडामुक्त बिहार’ की बात करते आए हैं और प्रशासनिक स्तर पर सख्ती उनकी पहचान बन चुकी है। सूत्र बताते हैं कि उद्योगों की सुरक्षा को लेकर सबसे अधिक जोर उन्हीं की ओर से आया और इसी वजह से बीआईएसएफ को सरकार के ज़ीरो टॉलरेंस मॉडल का केंद्र माना जा रहा है। कुछ विश्लेषक तो इसे सम्राट चौधरी की राजनीतिक छवि को और मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, क्योंकि इस फोर्स की सफलता सीधे उनके कड़े प्रशासनिक रवैये के समर्थन में जाएगी।
राज्य सरकार पहले ही 26,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक विस्तार की योजना पर काम कर रही है, भारत और विदेशों में इन्वेस्टर मीट होने वाले हैं और सरकार को पता है कि अगर सुरक्षा को नया स्तर नहीं मिला तो ये महत्वाकांक्षी योजनाएं कागज़ों से बाहर नहीं आ पाएंगी। बीआईएसएफ इस पूरे मिशन की रीढ़ मानी जा रही है, क्योंकि निवेश तभी आता है जब सुरक्षा मजबूत हो और सुरक्षा के साथ उद्योग, रोजगार और विकास अपने आप आगे बढ़ते हैं।




















