Bihar BJP President Change: बिहार की राजनीति गुरुवार सुबह एक नई सुगबुगाहट के साथ जागी, जब भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल की संभावनाएं तेजी से चर्चाओं में आ गईं। विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद अब बीजेपी अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की तैयारी में है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार जायसवाल मंत्री बनकर एक बार फिर नीतीश सरकार में लौट आए हैं, जिसके बाद पार्टी के भीतर नया नेतृत्व उभरने की संभावना मजबूत हो गई है। यह बदलाव सिर्फ संगठन के शीर्ष चेहरे को बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीजेपी के 2025–30 के रोडमैप को भी नए सिरे से परिभाषित करेगा।
गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में दिलीप जायसवाल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं दो डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण के तुरंत बाद संगठन में बदलाव की चर्चा और भी तेज हो गई। माना जा रहा है कि पार्टी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ सिद्धांत पर आगे बढ़ते हुए नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द कर सकती है।
दिलीप जायसवाल पहले भी नीतीश कैबिनेट का हिस्सा रहे हैं। बिहार भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने राजस्व मंत्री पद छोड़ दिया था, ताकि संगठन की कमान को पूरी ताकत से संभाल सकें। लेकिन इस साल फरवरी में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में कई नई संभावनाओं को जन्म दिया। उनकी जगह संजय सरावगी को राजस्व विभाग की जिम्मेदारी मिली। अब जब जायसवाल फिर से मंत्रिपरिषद में लौट आए हैं, तो यह साफ संकेत है कि भाजपा नेतृत्व अगले कुछ दिनों में बिहार के संगठन में नया चेहरा लाने की दिशा में निर्णायक कदम उठा सकता है।
दिलीप जायसवाल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव में भी दमदार प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि उनकी वापसी सरकार के भीतर मजबूती और संगठन में बदलाव की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
बीजेपी के अंदर नए अध्यक्ष को लेकर कई नामों की चर्चा है, लेकिन अंतिम निर्णय दिल्ली हाईकमान के हाथ में है। नीतीश मंत्रिमंडल में भाजपा की बड़ी भागीदारी और संगठन में संभावित बदलाव यह संकेत दे रहा है कि पार्टी बिहार में 2029 तक के चुनावी चक्र को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर आगे बढ़ रही है। दिलीप जायसवाल का मंत्री पद की शपथ लेना इसी दीर्घकालिक प्लानिंग की मजबूत कड़ी माना जा रहा है।
फिलहाल बिहार की सियासत में यह सवाल सबसे बड़ा है कि भाजपा अगला प्रदेश अध्यक्ष किसे बनाएगी और नया नेतृत्व संगठन को किस दिशा में ले जाएगा। लेकिन इतना तय है कि जायसवाल की सरकार में वापसी के साथ ही बिहार भाजपा अब एक नए अध्याय की शुरुआत करने वाली है।






















