Rakesh Tiwari: पटना की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज है। बिहार बीजेपी के प्रदेश कोषाध्यक्ष और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे राकेश कुमार तिवारी के सामने कानूनी चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक ओर जहां पटना की अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है, वहीं दूसरी ओर बिहार पुलिस की विशेष जांच समिति ने क्रिकेट प्रशासन से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों में पहले की जांच को दोषपूर्ण बताते हुए दोबारा जांच की सिफारिश कर दी है।
अदालती आदेश के मुताबिक, राकेश कुमार तिवारी पर एक विज्ञापन कंपनी से फर्जी दस्तावेजों के जरिए 36 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। यह मामला पटना के पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नगर निगम की कथित एनओसी दिखाकर सीसीटीवी और विज्ञापन डिस्प्ले का काम दिलाने के नाम पर बड़ी रकम हड़प ली गई। अदालत ने पहले उन्हें पेश होने का मौका दिया था, लेकिन तय तारीख पर हाजिर न होने के कारण अब गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया है और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि बीजेपी में ऊंचे पद पर होने के कारण राकेश कुमार तिवारी का प्रभाव लंबे समय तक जांच की रफ्तार पर भारी पड़ता रहा। हालांकि, अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। विशेष जांच समिति की रिपोर्ट ने साफ किया है कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े कम से कम दो बड़े मामलों में पहले की गई जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई थी। इन मामलों में न तो अहम साक्ष्यों की जांच की गई और न ही दस्तावेजी प्रमाणों को गंभीरता से परखा गया।
कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में आरोप है कि अन्य राज्यों के खिलाड़ियों से मोटी रकम लेकर उन्हें फर्जी डोमिसाइल और जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर बिहार की टीम में शामिल किया गया। समिति ने पाया कि इस केस में उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग और प्रशासनिक पत्राचार को नजरअंदाज कर दिया गया था। इसी तरह, श्रीकृष्णापुरी थाना क्षेत्र के एक अन्य मामले में बीसीए के कोषाध्यक्ष की मौत के बाद भी उनके हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर बैंक से रकम निकालने के आरोप हैं, जिसे पहले “तथ्य की भूल” बताकर बंद कर दिया गया था। अब इन दोनों मामलों में नए सिरे से जांच की तैयारी है।
यह पूरा प्रकरण सिर्फ अदालत और पुलिस तक सीमित नहीं रहा है। बिहार विधानसभा में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दे चुकी है, जहां बाहरी खिलाड़ियों को पैसे लेकर बिहार टीम में शामिल करने के आरोप लगाए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि राकेश कुमार तिवारी के बीसीए अध्यक्ष पद से हटने के बाद उनके बेटे हर्षवर्धन इस पद पर काबिज हो गए।






















