बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (Bihar Board Exam 2026) एक बार फिर देशभर में चर्चा का केंद्र बन गई है। वजह वही पुरानी लेकिन हर साल और मजबूत होती पहचान—सबसे पहले 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करना और फिर रिकॉर्ड समय में रिजल्ट जारी करना। साल 2026 की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर BSEB ने 26 जनवरी को आधिकारिक गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना छात्रों के लिए भारी पड़ सकता है। परीक्षा की तैयारी सिर्फ सिलेबस और रिवीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों की समझ भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी गलती पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर सकती है।
इस बार इंटरमीडिएट की परीक्षा 2 फरवरी से शुरू हो रही है, यानी समय बेहद कम है। ऐसे में बोर्ड ने साफ संकेत दिया है कि अनुशासन और समयपालन पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। बिहार बोर्ड पहले ही दिसंबर में परीक्षा तिथियों का ऐलान कर चुका था, जिसके बाद छात्रों ने पढ़ाई की रणनीति बनाई होगी। अब परीक्षा के ठीक पहले जारी की गई गाइडलाइंस यह बताती हैं कि बोर्ड का फोकस सिर्फ परीक्षा कराने पर नहीं, बल्कि उसे पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ संपन्न कराने पर है।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अनुसार इंटरमीडिएट यानी 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएंगी। वहीं हाई स्कूल यानी 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच होगी। इन तारीखों के साथ ही बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम तय कर दिए हैं। छात्रों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य होगा। मुख्य द्वार परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा पहले बंद कर दिया जाएगा और इसके बाद किसी भी स्थिति में प्रवेश नहीं मिलेगा।
पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी। इस पाली के परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा केंद्र के गेट 8:30 बजे खोले जाएंगे और ठीक 9 बजे बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद चाहे कोई भी कारण हो, किसी छात्र को अंदर प्रवेश नहीं मिलेगा। दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगी, जिसके लिए 1:30 बजे से एंट्री दी जाएगी और 2 बजे गेट बंद कर दिए जाएंगे। बोर्ड का यह सख्त रुख साफ करता है कि इस बार “लेट एंट्री” के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।
गाइडलाइंस में सबसे अहम और कड़ा संदेश कानूनी कार्रवाई को लेकर दिया गया है। बोर्ड की अधिसूचना के मुताबिक अगर कोई परीक्षार्थी जबरदस्ती या अवैध तरीके से परीक्षा परिसर में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसे दो वर्षों के लिए परीक्षा से निष्कासित किया जा सकता है और उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज होगी। यही नहीं, अगर किसी केंद्र पर अवैध रूप से आए परीक्षार्थी को बैठने की अनुमति दी जाती है, तो संबंधित केंद्राधीक्षक पर निलंबन और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी तय किया गया है।




















