Bihar Budget 2026: बिहार विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट जैसे ही पेश हुआ, राजनीतिक और आर्थिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने महज 11 मिनट में 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट सदन के पटल पर रख दिया और साफ संदेश दिया कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि “विकसित और आत्मनिर्भर बिहार” की रूपरेखा है। सरकार का दावा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है और पिछले वर्ष की तुलना में इसमें भारी बढ़ोतरी की गई है।
बजट भाषण की शुरुआत में वित्त मंत्री ने जनता के जनादेश के लिए आभार जताया और कहा कि यह बजट सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और आर्थिक मजबूती के तीन स्तंभों पर आधारित है। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए बताया कि मखाना बोर्ड, आईटीआई विस्तार, सिंचाई परियोजनाओं और हवाई अड्डा विकास जैसी योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर से समर्थन मिला है, जिससे बिहार की विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।
विजेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास मॉडल को बजट का आधार बताते हुए कहा कि “ज्ञान, ईमान, विज्ञान, अरमान और सम्मान” के पांच सूत्र बिहार को समृद्ध और ताकतवर राज्य बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, उसी तरह बिहार भी देश के सबसे तेज विकास दर वाले राज्यों में शामिल हो रहा है। सरकार के अनुसार 2025-26 में बिहार की आर्थिक वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
इस बजट में सात निश्चय-3 को विकास का मुख्य इंजन बताया गया है। सरकार का लक्ष्य है प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना, एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना। वित्त मंत्री ने बताया कि अब तक 1 करोड़ 56 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दी जा चुकी है और आगे उनके व्यवसाय को बढ़ाने के लिए दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त मदद का प्रावधान किया जाएगा।
गरीबी उन्मूलन और स्वरोजगार को भी बजट की धुरी बनाया गया है। जाति आधारित गणना में चिन्हित 94 लाख गरीब परिवारों को लघु उद्यमी योजना से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही स्थानीय हाट-बाजारों के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। उद्योग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करने, चौथे कृषि रोडमैप से किसानों की आय बढ़ाने और डेयरी, मत्स्य पालन व मखाना उद्योग को प्रोत्साहन देने की घोषणा भी बजट का अहम हिस्सा रही।
शिक्षा और स्वास्थ्य को दीर्घकालीन विकास का आधार मानते हुए सरकार ने प्रत्येक प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज स्थापित करने तथा जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही पांच नए एक्सप्रेस-वे, सौर ऊर्जा के विस्तार, शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास और पर्यटन व खेल को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की बात कही गई।
वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो बजट का आकार 3.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष से करीब 30 हजार करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने यह भी दावा किया कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से नीचे रखा गया है, जिससे वित्तीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन बना रहेगा। राजस्व अधिशेष और पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी को भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार योजनाओं की रीढ़ बताया गया।
बजट भाषण के अंत में वित्त मंत्री ने कहा कि यह केवल एक साल की योजना नहीं, बल्कि आने वाले दशक के लिए बिहार की दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। सरकार का उद्देश्य है कि बिहार को केवल सहायता पर निर्भर राज्य से निकालकर उत्पादन, निवेश और नवाचार का केंद्र बनाया जाए। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि 11 मिनट में पेश किए गए इस मेगा बजट की घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और आम लोगों के जीवन में कितना बदलाव लाती हैं।






















