Bihar Budget 2026: बिहार विधानसभा में पेश हुआ बजट 2026 केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि नीतीश सरकार की राजनीतिक और आर्थिक सोच का रोडमैप बनकर सामने आया है। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने 3.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश करते हुए यह स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाएं चलाना नहीं बल्कि “सबका सम्मान और जीवन आसान” की अवधारणा को जमीन पर उतारना है। इस बजट के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में बिहार को तेज विकास दर, कृषि आधारित उद्योग और महिला सशक्तिकरण के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा।
इस बार बजट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि बिहार अब केवल पिछड़ेपन की राजनीति से बाहर निकलकर विकास की प्रतिस्पर्धा में खुद को शामिल करना चाहता है। सरकार के अनुमान के अनुसार राज्य की आर्थिक विकास दर 14.9 प्रतिशत रहने वाली है, जो इसे देश के तेजी से बढ़ते राज्यों की श्रेणी में रखती है। बजट का आकार भी अपने आप में एक संकेत है कि योजनाओं का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ने वाले हैं। बड़ा बजट यह बताता है कि सरकार अब दीर्घकालिक निवेश और संरचनात्मक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
नीतीश सरकार ने इस बजट को ‘सात निश्चय-3’ के संकल्प से जोड़ा है, जिसमें ईमान, ज्ञान, विज्ञान, अरमान और सम्मान को विकास के पांच स्तंभ बताया गया है। यह विचारधारा यह दर्शाती है कि सरकार केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि सामाजिक और मानवीय विकास को भी उतनी ही प्राथमिकता दे रही है। वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार के सहयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेश केंद्रीय बजट का उल्लेख करते हुए मखाना बोर्ड, हवाई अड्डा विस्तार और कृषि परियोजनाओं को बिहार के लिए निर्णायक कदम बताया।
बजट का एक बड़ा सामाजिक पहलू वृद्धजनों और आम नागरिकों की सुविधाओं से जुड़ा है। सरकार ने घोषणा की है कि अब बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाएं घर पर ही उपलब्ध कराई जाएंगी और संपत्ति पंजीकरण जैसी जटिल प्रक्रिया को भी घर बैठे पूरा करने की सुविधा दी जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि सरकारी सेवाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक ढांचे को और सरल व डिजिटल बनाया जाएगा, जिससे आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बिहार एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की शुरुआत को इस बजट की बड़ी रणनीतिक घोषणा माना जा रहा है। शुरुआती चरण में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि खेती को अब सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात से जोड़ा जाएगा। सुगंधित चावल की किस्मों जैसे सोना चूर, कटरनी और मक्का के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ श्रीअन्न, स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसे हाई वैल्यू फसलों पर भी फोकस किया गया है। इससे बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
महिला सशक्तिकरण इस बजट की सबसे मजबूत धुरी बनकर उभरा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1 करोड़ 56 लाख से अधिक महिलाओं को पहले ही आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और अब उनके छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने के लिए दो लाख रुपये तक अतिरिक्त सहायता देने की योजना है। सरकार का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तभी समाज और राज्य दोनों मजबूत होंगे। यह बजट महिला उद्यमिता को बढ़ावा देकर बिहार की सामाजिक संरचना में बदलाव की दिशा दिखाता है।
कुल मिलाकर बिहार बजट 2026 को पांच बड़े संदेशों में समझा जा सकता है। पहला, राज्य की अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार देने का लक्ष्य। दूसरा, सात निश्चय-3 के जरिए विकसित बिहार की परिकल्पना। तीसरा, नागरिक सुविधाओं को घर तक पहुंचाने की नीति। चौथा, कृषि को उद्योग से जोड़ने की रणनीति। पांचवां, महिलाओं को आर्थिक विकास की मुख्य धारा में शामिल करने का संकल्प। यह बजट बताता है कि नीतीश सरकार आने वाले वर्षों में बिहार को केवल योजनाओं का राज्य नहीं बल्कि अवसरों का राज्य बनाने की कोशिश कर रही है।






















