बिहार के नए बजट में 10 प्रतिशत से अधिक ग्रोथ (Bihar Budget Growth) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने बजट को राज्य की आर्थिक दिशा बदलने वाला बताते हुए कहा कि बिहार अब वित्तीय अनुशासन और विकास की नई रफ्तार पकड़ चुका है। उन्होंने दावा किया कि पहले जहां कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने में दिक्कत होती थी, वहीं अब बजट का आकार बढ़कर लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो राज्य की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का संकेत है।
संजय झा के अनुसार बिहार की जीडीपी ग्रोथ डबल डिजिट में पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है, खासकर तब जब कोरोना काल जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी राज्य ने विकास की गति बनाए रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विजन आने वाले पांच वर्षों में राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने पर केंद्रित है और इसी के तहत एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया गया है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि सरकारी नौकरियों की संख्या सीमित होती है, लेकिन निजी निवेश और औद्योगिक विकास के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की रणनीति बनाई गई है।
उन्होंने उद्योग और निवेश को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में उद्योगों के सवाल पर स्पष्ट चर्चा नहीं होती, जबकि राज्य में अब बुनियादी ढांचे, बिजली, सड़क और कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की सोच बदल चुकी है। उनके मुताबिक निवेश का माहौल बनने से आने वाले वर्षों में उद्योगों की संख्या बढ़ेगी और इससे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
उत्तर बिहार में मखाना बोर्ड बनने को उन्होंने किसानों के लिए सकारात्मक कदम बताया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि अगले पांच साल बिहार के लिए निर्णायक होंगे, क्योंकि इसी दौरान निवेश, उद्योग और रोजगार का नया मॉडल तैयार होगा, जो राज्य की आर्थिक संरचना को मजबूत करेगा।
नीतीश कुमार की सेहत को लेकर विपक्ष के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से सत्ता से बाहर है और जनता ने उन्हें लगातार नकारा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कठिन परिस्थितियों में भी चुनाव प्रचार किया, जबकि विपक्ष सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहा। संजय झा ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बिहार की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जिससे राज्य की सकारात्मक छवि प्रभावित होती है।






















