देश में बजट की आहट के साथ ही राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार के 28 जनवरी से शुरू होने वाले संभावित बजट सत्र (Bihar Budget Session) और 1 फरवरी को प्रस्तुत किए जाने वाले केंद्रीय बजट ने राज्यों में भी वित्तीय तैयारी को रफ्तार दे दी है। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्यय और वर्ष 2025-26 के तीसरे अनुपूरक बजट की प्रक्रिया को गति देना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार बिहार विधानसभा का बजट सत्र फरवरी के तीसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है, हालांकि अभी तक आधिकारिक तिथियों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नौकरशाही स्तर पर फाइलें तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
बिहार के तीसरे अनुपूरक बजट का सबसे बड़ा फोकस योजनाओं के खर्च पैटर्न में बदलाव पर रहेगा। कई विभागों से ऐसे प्रस्ताव मांगे गए हैं जिनमें उन योजनाओं का बजट कम या ट्रांसफर किया जा सके जिनमें खर्च अब लाभकारी या आवश्यक नहीं माना जा रहा है। सरकार का इरादा उन क्षेत्रों में अतिरिक्त धन उपलब्ध कराना है जहां वर्तमान परिस्थितियों में जरूरत बढ़ी है, ताकि राज्य स्तर पर गतिविधियों को पटरी पर रखा जा सके।
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वित्त विभाग ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लेकर भी स्पष्ट कर दिया है कि मैचिंग ग्रांट की व्यवस्था अनुपूरक बजट में सुनिश्चित की जाएगी। ऐसे कई मामलों में भारत सरकार की राशि जारी हो चुकी है, लेकिन राज्य बजट में उसके खर्च का विशेष प्रावधान नहीं किया जा सका था। तीसरे अनुपूरक बजट में इस अंतर को भी पाटा जाएगा, जिससे योजना का कार्यान्वयन बाधित न हो।
जानकारी ये भी है कि सभी विभागों को 19 जनवरी तक प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी शर्त रखी गई है कि किसी भी अतिरिक्त बजट आवंटन से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं जाना चाहिए। इससे यह संकेत मिलता है कि बिहार सरकार वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता में रख रही है, और केंद्र के वित्तीय मानकों के साथ तालमेल भी साधना चाहती है।
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गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 के लिए पहला अनुपूरक बजट 57,946 करोड़ रुपये और दूसरा अनुपूरक बजट 91,717 करोड़ रुपये का था। अब तीसरे अनुपूरक बजट को लेकर विभिन्न विभागों में कागजी और प्रशासकीय तैयारी जोरों पर है। यह भी माना जा रहा है कि बजट सत्र राजनीतिक दृष्टि से भी अहम हो सकता है, क्योंकि बिहार में अगले फैसलों से राज्य की वित्तीय नीति और केंद्र-राज्य संबंध दोनों पर असर पड़ने की संभावना है।






















