बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से साल 2026 का बजट सत्र (Bihar Budget Session 2026) बेहद अहम माना जा रहा है। विधानसभा और विधान परिषद के बजट सत्र का पूरा कार्यक्रम सामने आ चुका है, जिसने यह साफ कर दिया है कि फरवरी का महीना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए निर्णायक रहने वाला है। 2 फरवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलने वाला यह सत्र न केवल आगामी वित्तीय वर्ष की दिशा तय करेगा, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और विकास के विजन को भी सार्वजनिक करेगा।
इस बजट सत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नीतीश कुमार सरकार का पहला पूर्णकालिक बजट सत्र होगा। ऐसे में राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक इस पर खास नजरें टिकी हैं। सत्र की शुरुआत 2 फरवरी को राज्यपाल के संयुक्त अभिभाषण से होगी, जिसमें सरकार अपनी नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का खाका पेश करेगी। इसी दिन नवनिर्वाचित विधायकों और विधान पार्षदों का शपथ ग्रहण भी होगा, जो सत्र को औपचारिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।
राज्यपाल के अभिभाषण के साथ ही सरकार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट भी सदन में रखेगी। यह रिपोर्ट बिहार की मौजूदा आर्थिक स्थिति, विकास दर, राजस्व संग्रह, सरकारी खर्च और विभिन्न सेक्टरों में हुए विकास का विश्लेषण करेगी। माना जा रहा है कि इसी सर्वे के आधार पर बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी ढांचे और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर फोकस देखने को मिल सकता है।
3 फरवरी को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का मुख्य बजट पेश करेंगे। यह बजट न सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज होगा, बल्कि सरकार की राजनीतिक और आर्थिक सोच का प्रतिबिंब भी माना जाएगा। बजट के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर सदन में चर्चा शुरू होगी, जहां विपक्ष सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठा सकता है।
इसके बाद सत्र में चर्चा और जवाब का लंबा दौर चलेगा। 5 फरवरी को सरकार सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देगी, जबकि 6 फरवरी को आय-व्यय प्रस्तावों पर सामान्य चर्चा होगी। 9 फरवरी को सत्र का एक और अहम दिन रहेगा, जब सरकार वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसी दिन आय-व्यय पर सामान्य वाद-विवाद और सरकार का उत्तर भी दिया जाएगा।
10 और 11 फरवरी को अनुदान मांगों और अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी, जबकि 12 और 13 फरवरी को वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर बहस और मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 16 से 20 फरवरी तक लगातार अनुदान मांगों पर चर्चा और वोटिंग का दौर चलेगा, जो यह तय करेगा कि सरकार की योजनाओं को कितनी वित्तीय मंजूरी मिलती है।
सत्र के अंतिम चरण में विधायी कामकाज पर जोर रहेगा। 23 फरवरी को विनियोग विधेयक पर चर्चा होगी और सरकार अपना पक्ष रखेगी। 24 से 26 फरवरी तक राजकीय विधेयकों और अन्य शासकीय कार्यों पर विचार किया जाएगा। अंततः 27 फरवरी को बजट सत्र का समापन होगा, जब गैर सरकारी सदस्यों के प्रस्ताव और संकल्प सदन में लिए जाएंगे।






















