Bihar Budget Session 2026: बिहार विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दूसरे दिन शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर उठा और सरकार की ओर से ऐसा संकेत मिला जिसने हजारों शिक्षकों की उम्मीदों को नई ताकत दी है। लंबे समय से रुका हुआ म्यूचुअल ट्रांसफर और टीआर-3 शिक्षकों की पोस्टिंग का मामला सदन में गूंजा, जहां माले विधायक संदीप सौरव ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि आखिर म्यूचुअल ट्रांसफर का पोर्टल अचानक क्यों बंद किया गया और दूर-दराज जिलों में तैनात शिक्षकों को अब तक राहत क्यों नहीं मिली।
सदन में बहस के दौरान यह बात सामने आई कि टीआर-3 के तहत बहाल कई शिक्षक अपने गृह जिले से 300 से 500 किलोमीटर दूर तैनात हैं। इनमें बड़ी संख्या महिला शिक्षकों की भी है, जिनके लिए पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण इतनी दूर सेवा देना बेहद कठिन हो रहा है। संदीप सौरव ने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता बताते हुए कहा कि सरकार को तुरंत ट्रांसफर प्रक्रिया बहाल करनी चाहिए और म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प फिर से खोलना चाहिए ताकि शिक्षक आपसी सहमति से अपनी पोस्टिंग बदल सकें।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और म्यूचुअल ट्रांसफर समेत स्थानांतरण की प्रक्रिया पर दोबारा विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीआर-1 और टीआर-2 के तहत बहाल शिक्षकों के लिए ट्रांसफर का विकल्प पहले से खुला है, जबकि टीआर-3 के मामले में समय-सीमा पूरी होने के बाद उसी प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जाएगी। मंत्री के इस बयान को शिक्षकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पहली बार सरकार की ओर से यह संकेत मिला कि बंद किया गया म्यूचुअल ट्रांसफर पोर्टल दोबारा खोला जा सकता है।
यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी बन गया है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षकों की पोस्टिंग में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ वही शिक्षक हैं जो गांवों और कस्बों में बच्चों को भविष्य की दिशा देते हैं। सदन में यह तर्क भी रखा गया कि अगर शिक्षक मानसिक और पारिवारिक तनाव में रहेंगे तो शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा। ऐसे में मनचाही जगह पोस्टिंग की सुविधा देना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसी बहस के दौरान उच्च शिक्षा से जुड़ा एक और अहम विषय सामने आया। कई विधायकों ने अपने क्षेत्रों में डिग्री कॉलेज नहीं होने की समस्या उठाई। शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की योजना है कि प्रत्येक प्रखंड में चरणबद्ध तरीके से डिग्री कॉलेज की स्थापना की जाए। अगले चार वर्षों में करीब 213 नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। जहां भवन और संसाधन उपलब्ध हैं, वहां जल्द कक्षाएं शुरू की जाएंगी और जहां जमीन की कमी है, वहां जिला प्रशासन से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज की जाएगी।






















