बिहार विधानमंडल के बजट सत्र (Bihar Budget Session) के सातवें दिन सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव ने एक बार फिर कार्यवाही की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद में भी बहस की तपिश साफ नजर आई। राशन व्यवस्था यानी पीडीएस में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठे सवालों ने परिषद को ऐसा मंच बना दिया, जहां आरोप-प्रत्यारोप नीति से ज्यादा सियासी नोकझोंक में बदलते दिखे। इसी क्रम में राजद एमएलसी सुनील कुमार और मंत्री अशोक चौधरी आमने-सामने आ गए, जिससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
सवाल-जवाब की शुरुआत पीडीएस की कार्यप्रणाली पर हुई, जहां सुनील कुमार ने वितरण व्यवस्था में लापरवाही और सिस्टम स्तर पर खामियों की बात रखी। उन्होंने सरकार से यह जानना चाहा कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए क्या ठोस तैयारी की जा रही है। बहस अभी अपने तर्कपूर्ण चरण में ही थी कि मंत्री अशोक चौधरी खड़े होकर हस्तक्षेप करते नजर आए। उनके कटाक्ष ने बहस की दिशा बदल दी और मुद्दे से हटकर राजनीतिक अतीत पर वार-पलटवार शुरू हो गया। मंत्री ने पूर्ववर्ती शासनकाल का हवाला देते हुए तंज कसा कि जिनके दौर में अनाज वितरण का भरोसा नहीं बन पाया, वे आज सरकार से हिसाब मांग रहे हैं।
परिषद के सभापति ने बीच-बचाव कर व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन जवाबी-तंज की धार कम नहीं हुई। सुनील कुमार ने पीडीएस में व्याप्त कथित अनियमितताओं को सिस्टम की नाकामी बताया और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। वहीं, अशोक चौधरी ने विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए अपने प्रशासनिक दावों को रेखांकित करने की कोशिश की। इस टकराव ने सदन में नीति आधारित विमर्श की जगह सियासी टकराव को केंद्र में ला दिया, जिससे कार्यवाही की मूल भावना प्रभावित होती दिखी।
बता दें कि कल यानी मंगलवार को भी सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्री अशोक चौधरी और राजद एमएलसी सुनील कुमार में झड़प देखने को मिला था। दोनों सदस्यों ने एक दूसरे पर एक दूसरे साथ गाली-गलौज करने का आरोप भी लगाया था। विपक्ष के भारी बवाल के बाद सभापति ने पूरे विपक्ष को एक दिनों के लिए सदन से बाहर कर दिया था।






















