Bihar Bhawan in Mumbai: पटना में मंगलवार को हुई बिहार कैबिनेट की अहम बैठक ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में कई प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा हुई जिसमे एक बड़ा फैसला सीधे तौर पर बिहार और महाराष्ट्र के बीच की संवेदनशील राजनीतिक परिस्थिति से जुड़ता है। बैठक में मौजूद मंत्रियों की सहमति से नीतीश सरकार ने मुंबई में ‘बिहार भवन’ के निर्माण की मंजूरी दे दी। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कैबिनेट ने 314 करोड़ 20 लाख 59 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है।
बिहार सरकार का यह कदम प्रवासी बिहारियों के लिए महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है। हर साल लाखों प्रवासी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत में मुंबई का रुख करते हैं। प्रस्तावित बिहार भवन उनके लिए न सिर्फ एक सुविधा केंद्र होगा बल्कि महाराष्ट्र में मौजूद बिहार सरकार का आधिकारिक प्रशासनिक ठिकाना भी। इससे सरकारी कार्यों, दस्तावेजी औपचारिकताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सहायता सेवाओं को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।
नीतीश कैबिनेट की बड़ी बैठक में 41 प्रस्तावों पर मुहर.. कृषि से शिक्षा तक कई अहम फैसले
हालांकि इस फैसले का राजनीतिक टाइमिंग भी चर्चा में है, क्योंकि महाराष्ट्र में इन दिनों हिंदी भाषा और यूपी-बिहार के लोगों को लेकर पुरानी बहसें फिर से तेज़ हो गई हैं। बीएमसी चुनावों के बीच एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने भाषा और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे को दोबारा हवा देकर नई सियासी गहमागहमी पैदा कर दी है। ठाकरे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ मुंबई की रैली में कहा कि महाराष्ट्र पर हिंदी थोपने की कोशिश स्वीकार नहीं होगी। यूपी और बिहार से आने वाले लोगों को लेकर उनके विवादित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।
राज ठाकरे ने तीखे लहजे में यह तक कह दिया कि हिंदी उनकी भाषा नहीं है और अगर इसे ‘थोपने’ की कोशिश हुई तो उसे “लात मारकर बाहर” कर दिया जाएगा। ऐसे माहौल में नीतीश सरकार का यह फैसला एक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है कि बिहार अपने नागरिकों की उपस्थिति और अधिकार को किसी भी राज्य में लेकर गंभीर है।





















