बिहार में नई एनडीए सरकार (Bihar Cabinet Portfolio) के गठन के बाद अब सबसे बड़ी राजनीतिक जिज्ञासा मंत्रियों के विभाग बंटवारे को लेकर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किस मंत्री को कौन-सा मंत्रालय सौंपेंगे, इस पर पूरे राजनीतिक गलियारे की नज़र टिकी है। विभागों के वितरण के लिए सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर जेडीयू के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई, लेकिन बैठक खत्म होते ही नेताओं की चुप्पी ने सस्पेंस को और गहरा कर दिया।
बैठक से बाहर निकलते हुए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, वरिष्ठ नेता विजय चौधरी और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने किसी भी तरह की जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि यह खामोशी विभाग बंटवारे की संवेदनशीलता और अंतिम निर्णय से पहले किसी विवाद से बचने की रणनीति का हिस्सा है। मिली जानकारी के अनुसार जदयू के तरफ से जिन जिन मंत्रियों को जो जो विभाग मिलना है उस पर नीतीश कुमार के साथ इन सभी नेताओं की बड़ी बैठक हो रही थी और भारतीय जनता पार्टी के तरफ से जो विभाग मांगे गए हैं उन पर भी इस बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है।

सूत्र बताते हैं कि बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जेडीयू नेताओं ने हर मंत्री के विभाग पर लंबी और गंभीर चर्चा की। जेडीयू के भीतर यह सहमति बनी है कि विभागों का वितरण जातीय समीकरण, प्रशासनिक दक्षता, अनुभव और गठबंधन की जरूरतों के मुताबिक किया जाए। यह भी तय किया गया है कि कौन से प्रमुख मंत्रालय जेडीयू अपने पास रखेगी, और किन विभागों को सहयोगी दलों को दिया जाएगा। जेडीयू की रणनीति साफ है—ऐसे विभाग अपने पास रखना जो सरकार की साख और प्रदर्शन तय करते हों।
बैठक से जुड़े सूत्रों के मुताबिक विभागों का अंतिम प्रस्ताव तैयार हो चुका है और अब सिर्फ मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद सूची जारी की जाएगी। जेडीयू और भाजपा दोनों ही दलों के कई मंत्री अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं—कुछ नए मंत्रालय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो कुछ अपने पुराने मंत्रालय को बचाने के लिए प्रयासरत हैं।
सबसे अहम बात यह है कि विभाग बंटवारे की आधिकारिक घोषणा आज दोपहर किसी भी समय हो सकती है। संभावना इस बात की है कि दोपहर के बाद किसी भी समय विभागों का बंटवारा हो जाएगा और इसी मामले को लेकर मुख्यमंत्री आवास में जदयू के बड़े नेताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास मे बैठक चल रही थी।






















