Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से धर्म और संविधान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने अपने हालिया बयान से नया विवाद खड़ा कर दिया है। वोटर अधिकार यात्रा की समीक्षा बैठक में पहुंचे सिद्दीकी ने कहा कि हिंदू समाज को संविधान, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) की गहराई से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने जिस संघर्ष और विचारधारा की नींव रखी थी, उसे भूलना नहीं चाहिए।
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सिद्दीकी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी में सियासी दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने में जुटे हैं। राजद जहां एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर “वोट अधिकार यात्रा” के जरिए जनता से सीधा संवाद कर रहा है। इसी मंच से सिद्दीकी ने भारतीय जनता पार्टी को ‘थेथर पार्टी’ कहते हुए निशाना साधा और कहा कि बीजेपी को देश से माफी मांगकर सत्ता छोड़ देनी चाहिए।
सिद्दीकी के इस बयान को चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि सिद्दीकी ने साफ किया है कि उनका आशय सभी धर्मों के लोगों से है। लेकिन बिहार में भाजपा लगातार हिंदू वोटरों पर पकड़ बनाए हुए है। ऐसे में माना जा रहा है कि विपक्ष की यह कोशिश हो सकती है कि धर्मनिरपेक्षता और संविधान की चर्चा करके हिंदू समाज के उस तबके को जोड़ने का प्रयास किया जाए जो सामाजिक न्याय और अधिकारों के मुद्दों से प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, सिद्दीकी के बयान ने भाजपा को भी हमले का मौका दे दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राजद और विपक्षी दल हिंदू समाज को लेकर अपमानजनक बातें कर रहे हैं। भाजपा इसे चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है और यह मुद्दा आने वाले महीनों में और गरमा सकता है।






















