बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। राज्य के तीन प्रमुख सिविल कोर्ट—पटना, किशनगंज और गया—को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी (Bihar Bomb Threat) मिलने के बाद सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया। यह घटना न सिर्फ सिस्टम की साइबर सिक्योरिटी पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि न्यायिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएँ बढ़ाती है।
सबसे पहले पटना सिविल कोर्ट को आए धमकी भरे मेल ने पूरे परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा कर दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कोर्ट परिसर को घेर लिया और प्रवेश-निकास पर भारी सख्ती लागू कर दी। डॉग स्क्वॉड व बम निरोधक दस्ता परिसर में घंटों सघन तलाशी लेते रहे। हालांकि शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन प्रशासन इसे महज मजाक मानने की गलती नहीं कर रहा है।

इसके बाद किशनगंज सिविल कोर्ट और गया सिविल कोर्ट में भी ई-मेल के माध्यम से धमकी पहुँचने की पुष्टि हुई। तीन जिलों में एक साथ ऐसी धमकियों का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया है। सभी जगह जिलाधिकारी से लेकर एसपी स्तर तक अधिकारी सक्रिय हैं और कोर्ट परिसरों में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी टीम मिलकर हर संभावित जोखिम का मूल्यांकन कर रही हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ई-मेल भेजने वाला फिलहाल अज्ञात है और साइबर सेल उसकी लोकेशन व पहचान का पता लगाने में जुटी हुई है। ये धमकियाँ ऐसे समय में सामने आई हैं, जब बिहार में न्यायिक संस्थानों और प्रशासन के बीच सुरक्षा समन्वय को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।






















