बिहार इस समय भीषण शीतलहर (Bihar Cold Wave) और घने कोहरे की गिरफ्त में है। उत्तर भारत से आ रही बर्फीली पछुआ हवाओं ने राज्य भर में ठंड की तीव्रता को असामान्य स्तर तक पहुंचा दिया है। राजधानी पटना में हालात इतने गंभीर हो गए कि जिला प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के संचालन पर सख्त फैसला लेना पड़ा। पटना के जिलाधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार पांच जनवरी तक कक्षा पांचवीं तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रहेंगे, जबकि उच्च कक्षाओं के लिए समय में बदलाव किया गया है।

पटना डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने स्पष्ट किया है कि कड़ाके की सर्दी, सुबह के समय घना कोहरा और दिनभर चल रही ठंडी हवाएं छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं को पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है। वहीं कक्षा छह से बारहवीं तक के छात्रों के लिए स्कूल और कॉलेज अब सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक संचालित होंगे। यह आदेश पहले दो जनवरी तक लागू था, लेकिन मौसम की गंभीरता को देखते हुए इसकी अवधि बढ़ाकर पांच जनवरी कर दी गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले पटना प्रशासन ने आठवीं कक्षा तक के स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया था। अब मौसम में अपेक्षित सुधार न होने और न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट के चलते यह दायरा संशोधित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की समीक्षा के बाद आगे भी निर्णय बदले जा सकते हैं।
पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों में भी ठंड का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। बांका, मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में आठवीं कक्षा तक के स्कूल पांच जनवरी तक बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। ग्रामीण इलाकों में सुबह के समय दृश्यता बेहद कम हो जा रही है, जिससे न सिर्फ स्कूल बल्कि सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस बार ठंड ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर के मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से लगभग छह डिग्री कम है। यह बीते 27 वर्षों में दर्ज किया गया सबसे कम तापमान बताया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 1998 में बिहार ने ऐसी तीव्र ठंड का अनुभव किया था।






















