बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद कांग्रेस (Bihar Congress) संगठन लगातार आत्ममंथन के दौर से गुजर रहा है, लेकिन पार्टी के जिलास्तर के नेताओं का रवैया अब भी ढीला-ढाला ही दिख रहा है। सदाकत आश्रम में सोमवार को बुलाई गई बड़ी समीक्षा बैठक इसका सबसे बड़ा सबूत बन गई, जहां चुनावी पराजय के कारणों पर गंभीर चर्चा होनी थी। पार्टी ने जिलाध्यक्षों, फ्रंटल संगठनों और वरिष्ठ नेताओं को पूर्व में ही सूचना भेजकर स्पष्ट कर दिया था कि समीक्षा बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद कांग्रेस के 15 जिलाध्यक्ष बैठक में उपस्थित नहीं हुए।
प्रदेश नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सभी अनुपस्थित जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। चुनावी हार के बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के उद्देश्य से बुलायी गई बैठक में इस तरह की गैरहाजिरी ने कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी और नेतृत्व स्तर पर कमज़ोर पकड़ का भी संकेत दिया है। शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि यह बैठक चुनावी रणनीति की समीक्षा, ज़मीनी कमजोरियों की पहचान और अगले चुनावी चक्र के लिए संगठन को मज़बूत करने का अवसर थी, जिसे जिलाध्यक्षों ने गंभीरता से नहीं लिया।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने साफ कर दिया कि संगठन में किसी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी जिलों की इकाइयों पर है और यदि यही इकाइयाँ उदासीन रुख दिखाती हैं तो संगठन का भविष्य प्रभावित होगा।
विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए 43 नेताओं की सूची भी बैठक में चर्चा का विषय रही। प्रदेश कांग्रेस ने इन नेताओं पर कार्रवाई के लिए हाईकमान से अनुमति मांगी है। पार्टी का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम उठाए गए होते तो कई सीटों पर मुकाबला अधिक मजबूत किया जा सकता था।
नोटिस प्राप्त जिलाध्यक्षों की सूची
प्रमोद सिंह पटेल (पश्चिम चंपारण), शशिभूषण राय (पूर्वी चंपारण), शाद अहमद (अररिया), सुबोध मंडल (मधुबनी), सुनील यादव (कटिहार), गुरुजीत सिंह और उदय चंद्रवंशी (पटना ग्रामीण), आरएन गुप्ता (सुपौल), परवेज आलम (भागलपुर), अनिल सिंह (जमुई), मनोज पांडेय (बक्सर), उदय मांझी (गया), अरविंद कुमार (लखीसराय), इनामुल हक (मुंगेर), रोशन कुमार (शेखपुरा)।






















