बिहार कांग्रेस (Bihar Congress Crisis) एक बार फिर अंदरूनी संकट के दौर से गुजरती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में महज 6 सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। इन चर्चाओं ने तब और तूल पकड़ लिया जब कांग्रेस के सभी छह विधायकों के दल बदलने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में फैलने लगीं। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए सभी विधायकों को तुरंत दिल्ली तलब कर लिया है। पहले यह बैठक 23 जनवरी को प्रस्तावित थी, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए अब 22 जनवरी को ही कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में शीर्ष नेतृत्व और विधायकों के बीच अहम बातचीत होगी।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी इस बैठक को महज औपचारिक नहीं बल्कि एक निर्णायक संवाद के रूप में देख रहे हैं। वे सभी छह विधायकों से व्यक्तिगत रूप से वन-टू-वन बातचीत करेंगे ताकि उनकी नाराजगी, असंतोष और भविष्य की राजनीतिक चिंताओं को सीधे समझा जा सके। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया तो बिहार कांग्रेस में टूट की खबरें हकीकत में बदल सकती हैं। यही वजह है कि दिल्ली से सीधे ‘क्राइसिस मैनेजमेंट’ की कमान संभाली गई है।
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इस अहम बैठक में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और प्रभारी कृष्णा अल्लावारु भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि नेतृत्व विधायकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करेगा कि पार्टी में उनकी भूमिका और राजनीतिक भविष्य सुरक्षित है। साथ ही, उन्हें यह भी समझाया जाएगा कि दूसरी पार्टियों में जाने से उन्हें किन जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है और कांग्रेस में बने रहकर उन्हें क्या अवसर मिल सकते हैं।
दिल्ली में होने वाली इस बैठक की पृष्ठभूमि पटना से जुड़ी है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में लगातार बुलाई जा रही बैठकों में कई विधायकों की बार-बार गैरमौजूदगी ने शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी थी। यही संकेत दिल्ली तक पहुंचे और वहां से तुरंत हस्तक्षेप का फैसला लिया गया। इस बैठक में विधायक दल के निवर्तमान नेता शकील अहमद खां के साथ-साथ सांसदों को भी आमंत्रित किया गया है ताकि संगठनात्मक संतुलन पर व्यापक चर्चा हो सके।
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन विधायकों के दूसरी पार्टियों के संपर्क में होने की चर्चा है, उन्हें खासतौर पर राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात का मौका दिया जाएगा। बातचीत के आधार पर संगठन में उनकी भूमिका बढ़ाने, जिम्मेदारियां सौंपने और भविष्य की रणनीति में उन्हें शामिल करने पर भी विचार हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू विधायक दल नेता का चयन भी है। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक कांग्रेस विधायक दल का नेता तय नहीं हो सका है। इस कारण पार्टी विधानसभा के भीतर प्रभावी भूमिका निभाने में पिछड़ती रही है। एक सत्र समाप्त हो चुका है और अब बजट सत्र सामने है, लेकिन विधायक दल नेता के अभाव में न तो समितियों में मजबूती से बात रखी जा सकी और न ही विपक्ष की भूमिका पूरी ताकत से निभाई जा सकी। ऐसे में दिल्ली बैठक में इस मुद्दे पर भी मंथन होने की पूरी संभावना है।





















