बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी (Bihar Congress Crisis) भी आंतरिक खींचतान से उबरने में असफल दिखाई दे रही है। इसी बीच बिहार महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरवत जहां फातमा ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी है। उनके इस्तीफे ने यह साफ कर दिया है कि बिहार कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद अब सतह पर खुलकर उभरने लगे हैं।
फातमा ने अपने एक्स हैंडल पर विस्तृत पोस्ट जारी कर बताया कि टिकट बंटवारे के समय उनके साथ न सिर्फ पक्षपात किया गया, बल्कि महिलाओं को कांग्रेस में योजनाबद्ध तरीके से दरकिनार किया गया। उन्होंने लिखा कि 25 वर्षों के राजनीतिक अनुभव में उन्होंने नैतिकता और निडरता को हमेशा सर्वोपरि रखा, लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा महिलाओं को मात्र 8% टिकट दिए जाने से साबित होता है कि महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की बात सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है।

उनका कहना है कि पार्टी की इस कमजोर नीति का नतीजा यह रहा कि आज बिहार विधानसभा और विधान परिषद—दोनों सदनों में कांग्रेस की महिला प्रतिनिधित्व पूरी तरह शून्य पर आ गई है। उन्होंने इसे पार्टी की नीतिगत विफलता और नेतृत्व की लापरवाही बताते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण के मूल सिद्धांतों को दरकिनार किया गया, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी उन्हें अपने स्तर पर लेनी पड़ी।
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फातमा ने आगे लिखा कि महिला नेतृत्व की लगातार उपेक्षा ने उन्हें गहरे आत्म-मंथन की ओर धकेला, जिसके बाद पद छोड़ने का फैसला अटल हो गया। उन्होंने सोनिया गांधी को अपना प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनकी नैतिकता और पद के प्रति निर्मोहिता ने हमेशा उन्हें राजनीति में सही रास्ता दिखाया।
सबसे गंभीर आरोप उन्होंने यह लगाया कि दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व तक जमीनी कार्यकर्ताओं की वास्तविक राय और सुझाव पहुंचाए ही नहीं गए। उनके अनुसार, राहुल गांधी को बिहार की स्थिति को लेकर गलत जानकारी दी गई और यहाँ के कुछ लोगों ने उन्हें गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश की।






















