Bihar Congress: बिहार कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सड़कों पर आ गई है। दरभंगा जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चौपाल कार्यक्रम उस समय हंगामे का केंद्र बन गया, जब पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं ने मंच के सामने खुलकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए। कार्यक्रम का उद्देश्य जहां कार्यकर्ताओं से संवाद और संगठन को मजबूत करने का था, वहीं यह बैठक कांग्रेस की गुटबाजी और असंतोष की खुली तस्वीर बनकर सामने आई।
कार्यक्रम में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब बिहार कांग्रेस कमेटी के सदस्य राम नारायण झा ने राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के सामने नारेबाजी शुरू कर दी। उनका आरोप था कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र खत्म हो चुका है और फैसले बंद कमरों में लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस उम्मीद के साथ वे इस कार्यक्रम में आए थे कि जिला स्तर की समस्याएं सामने रखी जाएंगी, वह पूरी नहीं हो सकी। प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने के बजाय बंद कमरे में बैठक कर ली, जिससे नाराजगी फूट पड़ी।
हंगामा बढ़ता देख बिहार विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉ. मदन मोहन झा को मंच से उतरकर हाथ जोड़कर शांति की अपील करनी पड़ी, लेकिन कार्यकर्ताओं का आक्रोश थमता नजर नहीं आया। करीब दस मिनट तक कांग्रेस कार्यालय नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से गूंजता रहा। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर आगे बढ़े और माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
राम नारायण झा ने अपने राजनीतिक जीवन का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 1979 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी और छात्र संगठन व युवा कांग्रेस से लेकर जिला संगठन तक करीब 46 वर्षों तक पार्टी की सेवा की है। इसके बावजूद उन्हें लगातार उपेक्षित किया गया। उन्होंने सीधे तौर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए कि टिकट और संगठन के पद पैसे लेकर बांटे गए। झा का दावा है कि दिल्ली में रहने वाले एक व्यापारी से 16 लाख रुपये लेकर उसे एआईसीसी सदस्य बनाया गया और इस रकम का बंटवारा पार्टी के कुछ नेताओं में हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कई बार ई-मेल कर शिकायत की, लेकिन उन्हें एक भी जवाब नहीं मिला। इससे कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि जमीनी नेताओं की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच रही है। झा ने सवाल उठाया कि जब पार्टी अपने ही लोगों को न्याय नहीं दे पा रही है, तो देश को न्याय देने का दावा कैसे कर सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु तथा प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी मौजूद थे। इन्हीं नेताओं के सामने कार्यकर्ताओं ने मुर्दाबाद के नारे लगाए। यह दृश्य कांग्रेस के लिए न केवल संगठनात्मक संकट का संकेत है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी की कमजोर होती एकजुटता को भी उजागर करता है।
काफी देर तक चले हंगामे के बाद वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला और कार्यकर्ताओं को शांत कराया। हालांकि, इस घटना ने यह साफ कर दिया कि बिहार कांग्रेस के भीतर की कलह अब दबे शब्दों में नहीं, बल्कि खुले मंच से सामने आ रही है। आने वाले समय में यह विवाद पार्टी की रणनीति और नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।






















