बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मनरेगा को कमजोर किए जाने के आरोप और उत्तराखंड सरकार से जुड़े एक विवादित बयान को लेकर बिहार कांग्रेस (Bihar Congress Protest) ने खुलकर मोर्चा संभालने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस अब इन मुद्दों पर खामोश नहीं रहेगी और सीधे जनता के बीच जाकर विरोध दर्ज कराएगी।
राजेश राम ने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना ग्रामीण गरीबों, महिलाओं और मजदूर वर्ग की जीवनरेखा है। इसे कमजोर करने की कोशिश दरअसल रोजगार के अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा के तहत काम के अवसर लगातार घट रहे हैं, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका संकट में है। कांग्रेस इसे केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा सवाल मानती है।
इसी के साथ उन्होंने उत्तराखंड सरकार से जुड़े एक मंत्री के पति द्वारा बिहार की महिलाओं पर दिए गए आपत्तिजनक बयान को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। राजेश राम ने कहा कि ऐसे बयान न सिर्फ महिलाओं का अपमान हैं, बल्कि पूरे बिहार की अस्मिता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोगों के बयानों और सोच से महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिलाओं के सम्मान और रोजगार के अधिकार की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी। उन्होंने बताया कि 8 तारीख को मनरेगा को लेकर बिहार कांग्रेस की एक अहम बैठक होगी, जिसमें आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद 10 तारीख से पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन शुरू होगा। यह आंदोलन प्रखंड स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक फैलाया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ जनदबाव बनाया जा सके। राजेश राम ने यह भी कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज पूरी मजबूती से उठाई जाएगी।






















