बिहार में भ्रष्टाचार (Bihar Corruption News) के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति एक बार फिर सुर्खियों में है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने शनिवार को मुजफ्फरपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की भी पोल खोलती है जहां नौकरी बचाने के लिए एक कर्मचारी को अपनी जिंदगी की जमा-पूंजी तक दांव पर लगानी पड़ी।

जानकारी के मुताबिक सुधीर कुमार न सिर्फ मुजफ्फरपुर के जिला कृषि पदाधिकारी थे, बल्कि उनके पास परियोजना निदेशक (आत्मा) और सहायक निदेशक (शस्य), तिरहुत प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार भी था। आरोप है कि उन्होंने कृषि विभाग के एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी संतोष कुमार से सेवा विस्तार और पुनः योगदान के बदले दो लाख रुपये की अवैध मांग की थी। आर्थिक संकट से जूझ रहे संतोष के लिए यह रकम किसी पहाड़ से कम नहीं थी, लेकिन नौकरी जाने का डर उससे भी बड़ा था।
पीड़ित के करीबी लोगों के अनुसार, रिश्वत की पहली किस्त चुकाने के लिए संतोष को बैंक से कर्ज लेना पड़ा, पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े और यहां तक कि अपनी गाड़ी तक बेचनी पड़ी। 5 दिसंबर को उन्होंने 1 लाख 81 हजार रुपये आरोपी अधिकारी को सौंप दिए, लेकिन इसके बाद भी चैन नहीं मिला। बचे हुए 19 हजार रुपये के लिए लगातार दबाव बनाया जाता रहा, जिससे मानसिक प्रताड़ना बढ़ती चली गई।
आखिरकार हिम्मत जुटाकर संतोष कुमार ने 11 दिसंबर को पटना स्थित निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की सत्यता की जांच के बाद निगरानी ने जाल बिछाया। तय योजना के तहत शनिवार को जब संतोष कुमार मुजफ्फरपुर के चर्च रोड स्थित सुधीर कुमार के निजी आवास पर शेष 19 हजार रुपये देने पहुंचे, तभी पहले से तैनात निगरानी टीम ने आरोपी को रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया।
निगरानी विभाग के डीएसपी मिथिलेश कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के आवास की तलाशी ली जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं उसके पास आय से अधिक संपत्ति तो नहीं है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को पटना ले जाया गया, जहां उन्हें विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।






















