Bihar Crime News: बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते 24 घंटे में सामने आई दो दर्दनाक घटनाओं ने न सिर्फ आम जनता को झकझोर दिया है बल्कि सियासी गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। गोपालगंज से आई खबर में डेढ़ साल की मासूम बच्ची को घर के दरवाजे पर खेलते वक्त अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की घटना ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया। इससे पहले एक युवती द्वारा युवक का नंबर ब्लैकलिस्ट करने पर उस पर तेजाब फेंकने की वारदात सामने आई। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अपराधियों के मन से पुलिस और कानून का डर खत्म हो चुका है।
राज्य में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर विपक्ष अब आक्रामक मूड में आ गया है। खास बात यह है कि गृह विभाग की जिम्मेदारी अब सम्राट चौधरी के पास है, जबकि लंबे समय तक यह विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहा। ऐसे में विपक्ष यह सीधा सवाल कर रहा है कि जब गृह मंत्रालय सत्ता पक्ष के पास है तो फिर मासूम बच्चियों और युवतियों के साथ इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं। विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी नहीं बल्कि प्रशासनिक असफलता का बड़ा उदाहरण है।
नीट छात्रा के मामले ने भी सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पुलिस के बयान बार-बार बदलने और शुरुआती जांच में भ्रम पैदा होने से जनता में अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। भले ही कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया हो, लेकिन इससे पुलिस की साख पर लगे सवाल खत्म नहीं हो रहे। विपक्ष इसे सीधे तौर पर सरकार की कार्यशैली से जोड़ रहा है और कह रहा है कि अगर पुलिस का इकबाल कायम होता तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।
इन तमाम घटनाओं के बीच विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है और माना जा रहा है कि यह सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है। तेजस्वी यादव और उनकी टीम ने सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। आरजेडी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव की भूमिका और भी अहम हो गई है। उनकी टीम राज्य में हुए अपराधों का पूरा डेटा जुटा रही है ताकि सदन में सरकार को तथ्यों के साथ घेरा जा सके। विपक्ष का फोकस मासूम बच्चियों के साथ हुई घटनाओं, नीट छात्रा केस, तेजाब हमले और लगातार बढ़ते अपराधों पर रहेगा।
तेजस्वी यादव पहले ही यह सवाल उठा चुके हैं कि जब सत्ता पक्ष यह कहता है कि 2005 से पहले जंगलराज था, तो आज क्या हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि जब आपकी सरकार है, गृह मंत्रालय आपके पास है, तब मासूमों के साथ इस तरह की घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा। विपक्ष इसे भावनात्मक मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।






















