Bihar Dakhil Kharij: बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर आम लोगों की सबसे बड़ी शिकायत दाखिल-खारिज में होने वाली देरी रही है। अब इसी मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को साफ संदेश दे दिया है कि लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। उन्होंने दाखिल-खारिज मामलों में अनावश्यक विलंब को सीधे तौर पर कर्तव्यहीनता करार दिया है और कहा है कि यह सिर्फ प्रशासनिक ढिलाई नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में किसी तरह की आपत्ति नहीं है, वहां तत्काल आदेश देना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद यदि अंचल अधिकारी या कर्मचारी जान-बूझकर फाइलें लटकाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। विजय सिन्हा का कहना है कि दाखिल-खारिज समय पर नहीं होने से रैयतों के जमीन के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाते, जिसका सीधा असर सरकारी योजनाओं, बैंक लोन, सब्सिडी और अन्य वैधानिक लाभों पर पड़ता है। ऐसे में आम आदमी को बेवजह दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिसे सरकार अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
सरकार की मंशा साफ है कि जमीन से जुड़ी सेवाएं पारदर्शी और समयबद्ध हों। इसी दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने भूमि मापी को लेकर महाअभियान की घोषणा की है। 26 जनवरी से 31 मार्च तक चलने वाले इस भूमि मापी महाअभियान के जरिए जमीन से जुड़े विवादों और लंबित मामलों को तेजी से निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करेगा, बल्कि जमीन मालिकों को भी बड़ी राहत देगा।
नई व्यवस्था के तहत अब अविवादित जमीन की मापी केवल सात दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। वहीं, विवादित जमीन की मापी के लिए अधिकतम 11 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। इसके अलावा मापी की रिपोर्ट को 14 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। पहले जहां भूमि मापी में 30 दिन तक का समय लग जाता था, वहीं अब इस प्रक्रिया को लगभग आधे से भी कम समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि यह पूरी पहल सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य जमीन प्रशासन को सरल, तेज और जनहितकारी बनाना है। सरकार चाहती है कि लोगों को जमीन से जुड़े कामों के लिए बार-बार अंचल कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें तय समय में सेवाएं मिलें। इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होगी।






















