बिहार की नई नीतीश सरकार में मंत्रियों के पदभार संभालने का सिलसिला शुरू होते ही नए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश (Deepak Prakash) बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बन गये हैं। इस बात के लिए वह लगातार ट्रोल हो रहे हैं। इस बीच एक और दिलचस्प कहानी सामने आ गई है, जो अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।
मंत्री दीपक प्रकाश ने पंचायती राज भवन निर्माण पर सख्त रुख अपनाया, कमेटी गठन का ऐलान
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश सासाराम सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी रामायण पासवान के काउंटिंग एजेंट बने थे। नतीजे आए तो रामायण पासवान को कुल 327 वोट मिले और उनकी जमानत तक जब्त हो गई। इसी बीच वही दीपक अब नीतीश सरकार में मंत्री बन चुके हैं। इस विरोधाभास ने सोशल मीडिया पर एक नया विमर्श खड़ा कर दिया है।
दिलचस्प यह कि उसी सीट से दीपक की मां स्नेहलता कुशवाहा राष्ट्रीय लोकमत (RLM) के टिकट पर चुनाव जीत गईं। लेकिन अपनी मां की काउंटिंग टीम में शामिल होने के बजाय दीपक ने निर्दलीय उम्मीदवार के लिए काउंटिंग RO की भूमिका निभाई। चुनाव आयोग के दस्तावेज भी इसकी पुष्टि करते हैं। आयोग की ओर से जारी पहचान पत्र में दीपक प्रकाश को रामायण पासवान के काउंटिंग एजेंट के तौर पर दर्ज किया गया है।

अब जब दीपक मंत्री बने हैं, चुनावी दस्तावेजों में मौजूद ‘काउंटिंग एजेंट’ वाली जानकारी फिर से सामने आ गई है। राजद ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा है कि सासाराम में जमानत जब्त कराने वाले निर्दलीय प्रत्याशी रामनारायण पासवान के काउंटिंग एजेंट बने दीपक प्रकाश बिना चुनाव लड़े नीतीश सरकार में मंत्री बन गए। है ना मोदी-नीतीश का जादू? अब और कैसा विकास चाहिए बिहार में?






















