पटना | वक्फ संशोधन बिल 2025 को लेकर देश की राजनीति में एक और सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विवादित बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, तो बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बेहद तीखे तेवर दिखाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले को न सिर्फ लोकतंत्र का अपमान बताया, बल्कि यह तक कह डाला कि “ऐसे लोगों को अब सदन में बैठने का हक नहीं रह गया है।”
“लोकसभा सर्वोच्च मंदिर, कोर्ट जाना उसका अपमान”: विजय सिन्हा
अपने बयान में विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि “जब लोकसभा, जो लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है, में पूरी चर्चा और मतदान के बाद कोई निर्णय लिया जाता है, और फिर भी कुछ लोग उस फैसले को कोर्ट में चुनौती देते हैं, तो क्या ऐसे लोगों को लोकतंत्र में बैठे रहने का अधिकार है?” उनका सीधा निशाना था उन नेताओं पर जो संसदीय निर्णयों को न मानकर न्यायपालिका का सहारा लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रवृत्ति न केवल संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि यह “संविधान-विरोधी मानसिकता” को दर्शाती है।
“तंग सोच वाले हैं ओवैसी-जावेद जैसे नेता”
डिप्टी सीएम ने और भी कड़े शब्दों में कहा कि “ऐसे तंग सोच वाले लोग चाहते हैं कि हर निर्णय उनकी मर्जी से हो। बार-बार संसद का अपमान करते हैं। इन्हें न लोकतंत्र में विश्वास है, न संविधान में। ये सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए संस्थाओं को बदनाम करते हैं।”
वक्फ संशोधन बिल 2025 को मोदी सरकार द्वारा लोकसभा में पारित किया गया है, जिसमें वक्फ बोर्डों के अधिकारों और संपत्ति प्रबंधन में बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए ज़रूरी है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक हस्तक्षेप और समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाला कानून बता रहा है। ओवैसी और जावेद का सुप्रीम कोर्ट जाना इसी असंतोष की परिणति है। लेकिन एनडीए और विशेष रूप से बीजेपी के नेता इसे “संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अभियान” करार दे रहे हैं।