Bihar digital exam evaluation: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य सरकार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की परीक्षा कॉपियों का मूल्यांकन अब डिजिटल मोड में कराने की तैयारी कर रही है। इस फैसले का मकसद केवल तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही देरी की समस्या को खत्म करना और छात्रों को समय पर रिजल्ट देना है।
शुक्रवार को विधान परिषद में शिक्षा मंत्री Sunil Kumar ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से संबंधित शिक्षकों के पास भेजा जाएगा और वहीं पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का प्रस्ताव विभाग की ओर से राजभवन को भेज दिया गया है। जैसे ही वहां से सहमति मिलेगी, इसे लागू कर दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री यह जवाब परिषद सदस्य Urmila Thakur के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर दे रहे थे। चर्चा के दौरान उन्होंने साफ कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य परीक्षा परिणामों में होने वाली अनावश्यक देरी को खत्म करना है, ताकि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य समय पर तय हो सके।
अब तक बिहार के विश्वविद्यालयों में परीक्षा कॉपियों की जांच पूरी तरह मैनुअल तरीके से होती रही है। इसमें उत्तर पुस्तिकाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में समय लगता है और कई बार कॉपियां समय पर मूल्यांकन केंद्र तक पहुंच ही नहीं पातीं। इसी वजह से रिजल्ट महीनों तक लटका रहता है। डिजिटल मूल्यांकन की व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी हद तक तेज और पारदर्शी हो जाएगी।
स्कैनिंग के बाद कॉपियां सीधे संबंधित शिक्षकों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भेजी जा सकेंगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि कॉपियों के गुम होने या देरी से पहुंचने जैसी शिकायतें भी कम होंगी। साथ ही, मूल्यांकन की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।






















