बिहार में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था (Bihar Digital Health) अब पारंपरिक तरीकों से आगे निकलकर पूरी तरह डिजिटल ट्रैक पर आ चुकी है। राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों तक दवाओं की आपूर्ति को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार की गई है, जिससे दवा की उपलब्धता, खपत और मांग पर रियल टाइम नजर रखी जा रही है। इस बदलाव का सीधा लाभ मरीजों तक समय पर और मुफ्त दवा पहुंचाने के रूप में सामने आ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के अनुसार राज्य के 14 हजार 337 स्वास्थ्य संस्थानों को ड्रग्स एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम यानी डीवीडीएमएस से पूरी तरह जोड़ा जा चुका है। यह सिस्टम भारत सरकार के डिजिटल हेल्थ पोर्टल पर आधारित है, जिसके माध्यम से दवाओं की सप्लाई चेन की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की जा रही है। इसी मजबूत व्यवस्था के कारण बिहार बीते 16 महीनों से डीवीडीएमएस के प्रदर्शन में पूरे देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।
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डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से दवा आपूर्ति प्रणाली को पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाया गया है। अब किसी भी स्तर पर दवा की कमी की स्थिति को पहले ही भांप लिया जाता है और समय रहते आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल और जिला अस्पताल तक सभी संस्थानों में दवाओं की स्थिति का आकलन अब वास्तविक समय में संभव हो गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि डीवीडीएमएस के सफल क्रियान्वयन से दवा प्रबंधन में होने वाली अनियमितताओं की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। पहले जहां दवाओं की मांग और खपत का आकलन अनुमान के आधार पर किया जाता था, वहीं अब डेटा आधारित निर्णय लिए जा रहे हैं। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और मरीजों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल रही है।
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सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि कोई भी मरीज सिर्फ दवा के अभाव में इलाज से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत गैर-संचारी रोगों जैसे बीपी और शुगर के मरीजों को एक साथ 30 दिनों की दवा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्हें बार-बार स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें। यह पहल खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के मरीजों के लिए राहत लेकर आई है।
दवा वितरण को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार की ओर से पूरे राज्य में 180 औषधि वाहनों का लगातार संचालन किया जा रहा है। ये वाहन समयबद्ध तरीके से स्वास्थ्य संस्थानों तक दवाएं पहुंचाकर सप्लाई चेन को निर्बाध बनाए हुए हैं।






















