बिहार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपनी आर्थिक मजबूती (Bihar Economic Growth) का जो संकेत दिया है, उसने राज्य के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देने का काम किया है। मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव के अनुसार, वर्तमान मूल्य पर राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वृद्धि दर 13.09 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि स्थिर मूल्य पर यह 8.64 प्रतिशत रही। यह दर बताती है कि उपभोग, निवेश और सरकारी व्यय के स्तर पर बिहार की अर्थव्यवस्था तेजी से गति पकड़ रही है। इस आर्थिक प्रगति का सकारात्मक प्रभाव राज्य के प्रति व्यक्ति आय पर भी दिखाई दिया, जो वर्तमान मूल्य पर बढ़कर 76,490 रुपये तक पहुंच गई है और स्थिर मूल्य पर 40,973 रुपये दर्ज की गई। आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक यह आंकड़े बिहार की आर्थिक सेहत और आय में सुधार के संकेतक हैं और यह भविष्य की विकास यात्रा को बल देंगे।
राज्य सरकार अब इस आर्थिक आधार को और मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण पर निवेश बढ़ा रही है। इसी क्रम में सरकार ने 357 नई विकास योजनाओं को मंजूरी प्रदान की है, जिन पर कुल 16,887 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। मंत्री ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत दिसंबर तक इन योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई है, ताकि इनके क्रियान्वयन में समय की देरी न हो और परिणाम धरातल पर जल्द दिखें।
युवा शक्ति को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता योजना एक गेम-चेंजर के रूप में उभरी है। इस योजना के तहत अब तक 8.76 लाख युवाओं को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और सरकार ने सीधे उनके खातों में कुल 1,267 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। ग्रामीण और शहरी युवाओं के लिए यह योजना रोजगार और स्वरोजगार दोनों की दिशा में बड़ा हस्तक्षेप मानी जा रही है।
मंत्रालय द्वारा क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने और सांसदों द्वारा अनुशंसित कार्यों में तेजी लाने के प्रयास भी जोर-शोर से जारी हैं। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत 72,206 योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं जिन पर 3,634 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा सांसद निधि (18वीं लोकसभा) के तहत 1108 योजनाएं पूरी हुईं जिन पर 117.65 करोड़ रुपये खर्च हुए, वहीं राज्यसभा अनुशंसा के तहत 2914 योजनाओं पर 261.95 करोड़ रुपये व्यय किए गए। मौजूदा समय में 17,621 क्षेत्रीय योजनाओं पर कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
गांवों में प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसी दिशा में षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर 2,000 पंचायत सरकार भवनों के निर्माण को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इससे पहले राज्य योजना के तहत 1,162 और पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना के तहत 293 पंचायत भवनों का सफल निर्माण किया जा चुका है। इन सबके बीच मंत्रालय की प्रेस वार्ता में विभाग के प्रधान सचिव मयंक बरबड़े और निदेशक रंजीत कुमार भी उपस्थित रहे।






















