बिहार विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण (Bihar Economic Survey 2025) ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की असली धुरी बने हुए हैं। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव की प्रतिक्रिया ने इस तथ्य को और मजबूती दी है कि बिहार की ग्रामीण संरचना, रोजगार और आय का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है। सकल राज्य मूल्यवर्धन में लगभग एक-चौथाई योगदान देने वाला कृषि क्षेत्र न सिर्फ आर्थिक गतिविधियों का आधार है, बल्कि सामाजिक स्थिरता का भी मजबूत स्तंभ है।
अवसंरचनात्मक सीमाओं, जलवायु परिवर्तन और मौसम आधारित जोखिमों के बावजूद बिहार के कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार दर्ज किया जा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार द्वारा किए गए सतत सार्वजनिक निवेश और नीतिगत सुधार अब ज़मीन पर असर दिखा रहे हैं। यह प्रगति किसी एक योजना का परिणाम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सोच और योजनाबद्ध हस्तक्षेपों का नतीजा है।
कृषि मंत्री ने विशेष रूप से चतुर्थ कृषि रोडमैप 2023–28 को किसानों के भविष्य से जोड़ते हुए बताया कि इसका मूल उद्देश्य किसानों को आय सुरक्षा देना और कृषि को लाभकारी बनाना है। इस रोडमैप के अंतर्गत फसल उत्पादन से लेकर बागवानी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्यिकी तक, सभी संबद्ध गतिविधियों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के बेहतर समन्वय से कृषि क्षेत्र को टिकाऊ विकास की दिशा में ले जाया जा रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और वितरण, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सिंचाई क्षमता का विस्तार और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने वाली बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति ने भी कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। समेकित बागवानी विकास मिशन के परिणामस्वरूप बागवानी अब बिहार के लिए एक उभरता हुआ और लाभकारी उप-क्षेत्र बन चुका है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022–23 से 2024–25 के बीच कृषि विद्युत सब्सिडी में लगभग 99.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो किसानों के लिए सीधी राहत का संकेत है। इसी अवधि में किसान क्रेडिट कार्ड धारकों की संख्या में 16.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ कृषि ऋण वितरण 9,399.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 2024–25 में सिंचाई क्षेत्र में 2,729.83 करोड़ रुपये के निवेश ने खेती की लागत घटाने और उत्पादन में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई है।




















