बिहार में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शिक्षा विभाग (Bihar Education Department Scam) में बहाली के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी किए जाने का आरोप लगा है। आउटसोर्सिंग प्रक्रिया के जरिए नियुक्ति का झांसा देकर करीब 40 लाख रुपये की अवैध वसूली की गई, जिसकी शिकायत अब सीधे विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। इस खुलासे ने न सिर्फ शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आउटसोर्सिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।
मामला मधेपुरा से जुड़ा है, जहां समाहरणालय के प्रभारी पदाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। पत्र में कहा गया है कि बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के तहत एक निजी एजेंसी के माध्यम से राज्य के प्रत्येक जिले में चार-चार पदों पर आउटसोर्सिंग के आधार पर नियुक्तियां की गई थीं। इसी प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है, जिसमें बिचौलियों की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है।
आरोप है कि नियुक्ति दिलाने के नाम पर युवाओं से प्रति व्यक्ति लाखों रुपये वसूले गए। नौकरी पाने की उम्मीद में अभ्यर्थियों ने मोटी रकम दी, लेकिन बाद में उन्हें ठगे जाने का एहसास हुआ। इस पूरे नेटवर्क में एजेंसी से जुड़े लोगों के साथ-साथ कथित दलालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो सरकारी नौकरी को खुलेआम सौदे में बदलते नजर आए।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना के कदमकुआं थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में चार लोगों को नामजद बिचौलिया बताया गया है, जिन पर ठगी और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की जा रही है।
प्रभारी पदाधिकारी ने अपने पत्र में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि इस घोटाले में विभागीय कर्मचारी या किसी स्तर के अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। इस सिफारिश ने शिक्षा विभाग में खलबली मचा दी है।
हालांकि, अब तक शिक्षा विभाग या बिहार शिक्षा परियोजना परिषद का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अपर मुख्य सचिव के स्तर से पूरे मामले की जांच और समीक्षा की जा रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।






















